अमेरिकी सिंगर रिहाना ने किसान आंदोलन का किया समर्थन, पूर्व क्रिकेटर प्रज्ञान ओझा बोले बाहरी के दख़ल की जरूरत नहीं - नियो पॉलिटिको

अमेरिकी सिंगर रिहाना ने किसान आंदोलन का किया समर्थन, पूर्व क्रिकेटर प्रज्ञान ओझा बोले बाहरी के दख़ल की जरूरत नहीं

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में 60 दिनों से ज्यादा किसान संगठनों का आंदोलन जारी है। इस आंदोलन को जहां देश की राजनीतिक पार्टियों ने समर्थन जताया है। 

वहीं बॉलीवुड के कई कलाकारों ने भी इसका समर्थन किया है। अब इसी कड़ी में विदेशी कलाकार भी इस आंदोलन पर अपनी सहमति जता रहे हैं। इसी क्रम में अमेरिकी सिंगर रिहाना ने भी किसान आंदोलन को समर्थन दे दिया है।

अमेरिकी सिंगर रिहाना ने प्रदर्शनस्थल पर इंटरनेट सेवाओं को बंद किए जाने वाली एक खबर को साझा करते हुए कहा, ‘हम इस बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं?’ रिहाने ने अपने ट्वीट के साथ #FarmersProtest भी जोड़ा है। रिहाना के ट्विटर पर दस करोड़ फॉलोवर हैं।

पूर्व क्रिकेटर ने दिया तगड़ा जवाब:

भारत के आंतरिक मामले में दखल देने पर भारत के पूर्व दिग्गज गेंदबाज प्रज्ञान ओझा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने रिहाना के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा- “मेरा देश हमारे किसानों पर गर्व करता है और जानता है कि वे कितना महत्वपूर्ण हैं।”

आगे ओझा ने कहा कि “मुझे विश्वास है कि यह मामला जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। हमें अपने आंतरिक मामलों में किसी बाहरी व्यक्ति के दखल की आवश्यकता नहीं है।”

भारत को तोड़ने की कोशिश: कंगना

कंगना रनौत ने रिहाना के इस ट्वीट का जवाब दिया। एक्ट्रेस कंगना रनौत ने ट्वीट करते हुए लिखा, “कोई भी इनके बारे में बात इसलिए नहीं कर रहा क्योंकि ये किसान नहीं है। ये आतंकवादी हैं, जो भारत को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। ताकि चीन हमारे कमजोर टूटे हुए राष्ट्र पर कब्जा कर सके और चाइनीस जैसी कॉलोनी बना सके।”

सरकार वार्ता को तैयार:

केंद्र सरकार ने कल लोकसभा में एक महत्वपूर्ण बयान में कहा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को कोई मुआवजा देने का कोई प्रस्ताव नहीं है। 

यह बात कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में कही। इस सवाल पर कि क्या सरकार के पास कानूनों को निरस्त करने की कोई योजना है, मंत्री ने कहा कि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कृषि कानूनों को लागू किया गया है। उन्होंने यह भी कहा, इस मुद्दे को हल करने के लिए सरकार और किसानों के बीच 11 दौर की वार्ता हो चुकी है। सरकार वार्ता के लिए तैयार है।

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