इटावा: इटावा जिले के दादरपुर गाँव में हाल ही में हुई एक भागवत कथा को लेकर काफ़ी बवाल मचा। कथावाचक मुकुटमणि अग्निहोत्री, जो स्वयं को ब्राह्मण बताते थे, उन पर आरोप लगा कि उन्होंने कथा के दौरान महिलाओं से छेड़छाड़ की और जबरन पैर धुलवाए। सोशल मीडिया पर इस घटना की कुछ वायरल वीडियो के आधार पर ब्राह्मण समाज के खिलाफ नफरत फैलने लगी। आरोप था कि जैसे ही पता चला कि कथावाचक यादव है उसके खिलाफ अभद्रता शुरू की गई और महिला से माफी मंगवाई गई।
इस मामले की सच्चाई जानने के लिए न्यू पॉलिटिको की टीम गाँव पहुँची और विभिन्न जातियों के लोगों से बातचीत की। गाँव की जनसंख्या में लगभग 50% ब्राह्मण और 50% अन्य जातियों के लोग शामिल हैं। हमने मामले की तह तक जाने के लिए अन्य जातियों के लोगों से बातचीत की। इस क्रम में हमें अनुसूचित जाति एवं ओबीसी वर्ग के लोग भी मिले। हालाँकि ज्यादातर ने मामले की सच्चाई तो बताई लेकिन कैमरे पर बोलने से मना कर दिया।
पिछड़े वर्ग के व्यक्ति ने बताई सच्चाई
गाँव में कुछ दूर चलने के बाद हमें सोरेन सिंह मिले जो झाड़ फूंक करने वाली जाति से आते हैं। बात करने पर इन्होंने बताया कि मुकुटमणि को गांव के ही एक बाबा के जरिये कथा के लिए बुलाया गया था। कथा का आयोजन मंदिर की ओर से था बस परीक्षित एक ब्राह्मण परिवार की महिला रेनू तिवारी को बनाया गया था। परीक्षित वह व्यक्ति हो जो सातों दिन भागवत सुनता है एवं सारे रीती रिवाजों का पालन करता है। इसके बाद मुकुटमणि अग्निहोत्री ने कथा शुरू की जिसमें कलश यात्रा हुई। इस दौरान उनका व्यवहार महिलाओं के प्रति ठीक नहीं था। मुकुटमणि ने इसके बाद भोजन के समय भी रेनू तिवारी से छेड़छाड़ शुरू की। कथावाचक बनकर आये मुकुटमणि ने कहा कि आप सातों दिन मुझे अपने हाथ से खाना खिलाओगी। वहीँ महिला से उन्होंने उनके चरण धोकर पीने को कहा। इसके बाद महिला ने इसकी शिकायत उनके पति से की। छेड़छाड़ की बात पर मुकुटमणि ने महिला से पाँव छूकर माफी मांगी। जिसकी अब वीडियो वायरल हो रही है।
आगे सोरेन ने बताया कि इसके बाद जाते हुए कथावाचक के बैग से दो आधार कार्ड निकले जिसमें उनके दो अलग अलग नाम थे। एक में मुकुटमणि अग्निहोत्री और एक में मुकुटमणि सिंह लिखा था। यहीं पर ग्रामीणों को कथावाचक के फर्जीवाड़े का शक हुआ। पेशाब छिड़कने की बातों को उन्होंने अफवाह बताया।
पिछड़ी जाति की महिला ने नकारे आरोप
एक अन्य पिछड़ी जाति की महिला बबली देवी ने बताया कि मामला जातिगत नहीं बल्कि छेड़खानी और धोखाधड़ी का है। महिलाओं ने भी इस बात की पुश्टि की कि कथावाचक ने उन्हें गलत ढंग से छूने की कोशिश की और उनसे अपने पैर धुलवाने और खाना खिलवाने की ज़िद की। उन्होंने बताया कि इसके बाद उनके फर्जीवाड़े की भी जानकारी हुई। यह पूछने पर कि क्या गांव के ब्राह्मण जातिवादी हैं तो उन्होंने कहा कि कैसे जातिवादी? आज तक उन्होंने कभी उनके साथ भेदभाव नहीं किया। उन्होंने कहा कि सारी गलती मुकुटमणि की थी।
दलित लड़के ने खोली कथावाचक की पोल
प्रिंस रावत गाँव के ही दलित समाज का एक युवा लड़का है। प्रिंस हमें गाँव में ही मिला जिसने पूरी सच्चाई हमें बताई। हमने कहा कि मुकुट मणि मामले से तो ब्राह्मणों का जातिवाद सामने आ गया तो उसने तुरंत हमने रोक दिया। प्रिंस ने बताया कि इस मामले में मुकुटमणि की वजह से गाँव की बदनामी हुई और साथ ही मीडिया ने भी जहर बोने का काम किया। युवक ने आगे बताया कि एक तो उसने सब लोगों से अभद्रता की तो साथ ही महिलाओं से छेड़खानी भी। मुकुटमणि को अखिलेश द्वारा सम्मान दिए जाने के प्रश्न पर भी प्रिंस ने सवाल खड़े किये। प्रिंस ने कहा कि अखिलेश जी ने बिना सच्चाई जाने बहुत गलत काम किया है।
