5 मासूमों को चढ़ा HIV संक्रमित खून! 41 डोनर्स गायब, 15 ने टेस्ट से किया इनकार — सतना ब्लड बैंक पर उठे बड़े सवाल

सतना : मध्य प्रदेश में थैलेसीमिया से पीड़ित 5 बच्चों को एचआईवी (HIV) संक्रमित खून चढ़ाए जाने के मामले में जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। दिसंबर 2025 में सामने आए इस गंभीर मामले की जांच कर रही स्वास्थ्य विभाग की ज्वाइंट टास्क टीम को अब रक्तदाताओं (डोनर्स) तक पहुंचने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जांच में पता चला है कि कई डोनर्स के नंबर बंद हैं, जबकि कुछ लोगों ने ब्लड टेस्ट कराने से साफ इनकार कर दिया है। इससे ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

41 डोनर्स के नंबर बंद, 15 लोगों ने ब्लड टेस्ट कराने से किया इनकार

स्वास्थ्य विभाग ने उन सभी लोगों की सूची तैयार की थी, जिनका खून थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को चढ़ाया गया था। कुल 196 रक्तदाताओं (डोनर्स) की पहचान की गई। इनमें से पहले ही 49 डोनर्स को ट्रैक कर उनका परीक्षण किया जा चुका है। बाकी बचे 147 संदिग्ध डोनर्स की तलाश शुरू की गई। जांच टीम ने इनमें से 34 लोगों को ढूंढकर उनका ब्लड टेस्ट कराया, जिनकी एचआईवी रिपोर्ट निगेटिव आई है। लेकिन जांच के दौरान सबसे बड़ी परेशानी तब सामने आई, जब 15 लोगों ने ब्लड टेस्ट कराने से साफ इनकार कर दिया, जबकि 41 डोनर्स के मोबाइल नंबर बंद मिले। अब ये 56 डोनर्स जांच टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं, क्योंकि इनके बिना यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि संक्रमित खून आखिर कहां से आया और जिम्मेदार कौन है। मंगलवार को मध्य प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण समिति की सहायक संचालक मोनल सिंह ने जिला अस्पताल के ब्लड बैंक का निरीक्षण किया। जांच के दौरान टीम ने यह आशंका जताई कि कई डोनर्स ने ब्लड बैंक के रजिस्टर में अपने असली नंबर देने के बजाय रिश्तेदारों या करीबियों के मोबाइल नंबर दर्ज कराए हो सकते हैं। इसी वजह से टीम को असली डोनर्स तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। मोनल सिंह ने ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली की विस्तार से समीक्षा भी की।

27 मई को कलेक्टर को सौंपी जाएगी रिपोर्ट, डोनर्स की होगी काउंसलिंग

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग लगातार जांच को आगे बढ़ा रहा है। सहायक संचालक मोनल सिंह अब 27 मई को सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस से मुलाकात कर जांच की ताजा स्थिति साझा करेंगी। प्रशासन ने यह भी तय किया है कि जो डोनर्स अब तक ICTC (इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर) नहीं पहुंचे हैं, उनकी काउंसलिंग की जाएगी, ताकि उन्हें ब्लड टेस्ट कराने के लिए तैयार किया जा सके। इस मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य आयुक्त धनराजू एस ने एक विशेष ज्वाइंट टास्क टीम बनाई है। इस टीम की जिम्मेदारी सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला को दी गई है। टीम में आईसीटीसी नोडल ऑफिसर डॉ. पूजा गुप्ता, ब्लड ट्रांसफ्यूजन अधिकारी डॉ. अंकिता पाण्डेय, मोनल सिंह और औषधि निरीक्षक प्रियंका चौबे को शामिल किया गया है। मंगलवार को हुए निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह समेत अन्य स्वास्थ्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

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