कैंपस में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए UGC के नए नियम, सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘इक्विटी कमेटी’ अनिवार्य

नई दिल्ली: कैंपस में जातिगत भेदभाव और असमानता पर लगाम लगाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने नए नियम अधिसूचित किए हैं। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस) रेगुलेशंस, 2026 के तहत अब देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘इक्विटी कमेटी’ का गठन अनिवार्य होगा। इन नियमों का उद्देश्य छात्रों, शोधार्थियों और कर्मचारियों के लिए भेदभाव-मुक्त और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना है। नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों पर UGC सख्त कार्रवाई कर सकता है, जिसमें केंद्रीय अनुदान से वंचित किया जाना भी शामिल है।

इक्विटी कमेटी की संरचना और शिकायतों पर कार्रवाई की समय-सीमा

नए नियमों के अनुसार, हर संस्थान में गठित होने वाली इक्विटी कमेटी में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), दिव्यांग व्यक्ति और महिलाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे। किसी भी तरह के भेदभाव की शिकायत मिलने पर कमेटी को 24 घंटे के भीतर बैठक कर प्रारंभिक कार्रवाई करनी होगी। वहीं, 15 कार्यदिवस के भीतर अपनी रिपोर्ट संस्थान प्रमुख को सौंपनी होगी। इसके बाद संस्थान प्रमुख को सात दिनों के अंदर आगे की कार्रवाई शुरू करनी होगी। यह स्पष्ट समय-सीमा पहले के ड्राफ्ट नियमों में तय नहीं की गई थी। नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि शिकायत करने वाले व्यक्ति को किसी भी प्रकार की प्रताड़ना या बदले की कार्रवाई से सुरक्षा दी जाएगी। साथ ही, इक्विटी कमेटी संस्थान में भेदभाव माने जाने वाले कृत्यों की एक उदाहरणात्मक सूची तैयार कर उसे प्रसारित करेगी।

ड्राफ्ट से बदलाव, निगरानी व्यवस्था और सख्त प्रावधान

UGC ने फरवरी 2025 में इन नियमों का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया था, जिस पर छात्रों और विभिन्न संगठनों की ओर से आपत्तियाँ दर्ज की गई थीं। खासतौर पर ड्राफ्ट में ‘झूठी शिकायत’ से जुड़े प्रावधान और जुर्माना या अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात थी, जिसे अंतिम नियमों से हटा दिया गया है। इसके अलावा, ड्राफ्ट में OBC को इक्विटी कमेटी और ‘जातिगत भेदभाव’ की परिभाषा से बाहर रखा गया था, जिसे अब शामिल कर लिया गया है। ये नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद लाए गए हैं। यह निर्देश रोहित वेमुला और पायल तडवी की माताओं की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया था, जिसमें 2012 के UGC नियमों के सही क्रियान्वयन पर सवाल उठाए गए थे। रोहित वेमुला (2016) और पायल तडवी (2019) की कथित तौर पर जातिगत भेदभाव के कारण आत्महत्या हो गई थी। नए नियमों के तहत संस्थानों में ‘इक्विटी हेल्पलाइन’ और ‘इक्विटी स्क्वाड’ भी बनाए जाएंगे, जो कैंपस में किसी भी तरह के भेदभाव पर निगरानी रखेंगे। इसके साथ ही, UGC राष्ट्रीय स्तर पर एक निगरानी समिति का गठन करेगा, जो नियमों के क्रियान्वयन पर नजर रखेगी और भेदभाव रोकने के उपाय सुझाएगी। यदि कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो UGC उसे अपनी योजनाओं से बाहर कर सकता है और केंद्रीय अनुदान की पात्रता भी समाप्त कर सकता है।

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