रोहतास: बिहार के रामूडीह गाँव स्थित उत्क्रमित उर्दू मध्य विद्यालय में उस समय हड़कंप मच गया, जब स्कूल के एक कमरे से 7 किलो से ज्यादा मांस बरामद हुआ। यह मांस चार काले रंग की प्लास्टिक थैलियों में रखा हुआ था। घटना के बाद अभिभावकों ने आरोप लगाया कि यह गो-मांस हो सकता है और इसे मिड-डे मील के नाम पर बच्चों को खिलाया जाता था। हालांकि प्रशासन ने अभी तक मांस के प्रकार की पुष्टि नहीं की है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए 5 शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है और जांच जारी है।
बच्चों की बदबू की शिकायत से खुला मामला, ग्रामीणों का हंगामा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना 22 अप्रैल 2026 की सुबह की है। रामूडीह गाँव के रहने वाले एक अभिभावक अपने बच्चे को स्कूल छोड़ने पहुंचे थे। उसी दौरान उन्होंने देखा कि कुछ बच्चे नाक-मुँह ढककर क्लासरूम से बाहर निकल रहे हैं। जब उनसे पूछा गया, तो बच्चों ने बताया कि कमरे के अंदर से तेज बदबू आ रही है। इसके बाद अभिभावक और अन्य ग्रामीण जब कमरे के पास पहुंचे, तो उन्होंने कोने में रखी चार काले रंग की प्लास्टिक की थैलियों को देखा। जब थैलियों को खोला गया, तो उसमें 7 किलो से ज्यादा मांस मिला। यह देखते ही गाँव में हड़कंप मच गया और सैकड़ों ग्रामीण स्कूल में जमा हो गए। लोगों ने आशंका जताई कि यह गो-मांस हो सकता है और इसे बच्चों के मिड-डे मील में इस्तेमाल किया जाता था। इस शक के चलते माहौल तनावपूर्ण हो गया और स्कूल में जमकर हंगामा हुआ। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि अभी तक मांस के प्रकार की पुष्टि नहीं हुई है और इसकी जांच कराई जा रही है।
प्रिंसिपल समेत 5 शिक्षक सस्पेंड, सभी के नाम सामने आए
घटना के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए स्कूल के प्रिंसिपल अख्तर अली समेत कुल 5 शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। निलंबित किए गए शिक्षकों के नाम हैं— अख्तर अली (प्रिंसिपल), मोहम्मद ईमान, अनवर खान, सूफिया खातून और हिना कौसर। इसके अलावा, स्कूल में कार्यरत 2 अन्य शिक्षकों को डेपुटेशन पर दूसरे स्कूल भेज दिया गया है। जानकारी के अनुसार, इस स्कूल में कुल 200 छात्र पढ़ते हैं, जिनमें 125 हिंदू और 75 मुस्लिम बच्चे शामिल हैं। स्कूल में कुल 7 शिक्षक थे, जिनमें से 5 को सस्पेंड कर दिया गया है। अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। फिलहाल प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि स्कूल में इतना मांस कैसे पहुंचा, किसने रखा और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था। साथ ही मांस की जांच कर यह भी पता लगाया जा रहा है कि वह किस प्रकार का था।
