उत्तर प्रदेश: भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने यूजीसी से जुड़े विवादित मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। एबीपी न्यूज से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इस मामले में “चूक तो बहुत बड़ी हो गई है।” उन्होंने ड्राफ्ट कमेटी, सिफारिशों और सोशल मीडिया पर हो रही बयानबाजी को लेकर भी अपनी बात रखी। बृजभूषण शरण सिंह ने साफ कहा कि इस मुद्दे को गांव-गांव जाकर समझने की जरूरत है और विरोध करते समय भाषा की मर्यादा बनाए रखना बेहद जरूरी है।
ड्राफ्ट कमेटी और सिफारिशों पर उठाए सवाल
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि एक चर्चा यह भी चल रही है कि जिस ड्राफ्ट कमेटी का नाम लिया जा रहा है, उसमें करण भूषण का भी नाम जोड़ा गया है और यह कहा जा रहा है कि उन्होंने भी इस पर साइन किए हैं। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी कमेटी ने इस तरह की सिफारिश की ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि कमेटी की असली सिफारिश कुछ और थी, फिर उसमें बदलाव किसने किया, क्यों किया और किस जरूरत के तहत किया गया—यह बड़ा सवाल है। उनके अनुसार, अगर सिफारिशों में बिना कारण बदलाव जोड़ा गया है तो यह गंभीर चूक है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि “यह गलती बहुत बड़ी हो गई है।”
गांव में जाकर समझें UGC का असर, भाषा का रखें ध्यान
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक विरोध का मुद्दा नहीं है। उन्होंने खुद को गांव से जुड़ा हुआ बताते हुए कहा कि गांवों में जाकर देखिए, लगभग हर वर्ग ने इस पर आपत्ति जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि जिनके बारे में यह दिखाया जा रहा है कि दलित या पिछड़ा समाज इस फैसले के समर्थन में है, वे भी कई जगह विरोध में नजर आ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सच में दलित या पिछड़ा समाज ऐसा कानून चाहता है? इस बात को दिल्ली में बैठकर कुछ लोगों की भीड़ से तय नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि जमीनी हकीकत समझने के लिए गांवों में जाकर लोगों से सीधी बात करनी चाहिए। सोशल मीडिया पर बन रही रील्स को लेकर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विरोध करना सभी का अधिकार है, लेकिन भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। चाहे कोई सवर्ण समाज के पक्ष में रील बना रहा हो या दलित-पिछड़े समाज के पक्ष में, सभी को संयमित और जिम्मेदार भाषा का उपयोग करना चाहिए।
