बहराइच: उत्तर प्रदेश के महसी तहसील में तैनात उपजिलाधिकारी (SDM) आलोक प्रसाद पर तीन होमगार्ड्स ने गंभीर आरोप लगाए हैं। होमगार्ड्स का कहना है कि ड्यूटी के दौरान SDM ने उनके साथ जातिसूचक गालियों का इस्तेमाल किया, शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया और जान से मारने की धमकी भी दी। वहीं, SDM आलोक प्रसाद ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया है। मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन स्तर पर जांच की तैयारी की जा रही है।
गालियां, जबरन सिट-अप और जान से मारने की धमकी
महसी SDM की सुरक्षा में तैनात तीन होमगार्ड्स—राजाराम शुक्ला, रमाकांत मिश्रा और रामकुमार तिवारी—ने लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि ड्यूटी के दौरान उनके साथ अभद्र और अपमानजनक व्यवहार किया गया। तीनों होमगार्ड ब्राह्मण समाज से हैं और वर्तमान में महसी कंपनी में तैनात हैं। शिकायत के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब एक दिव्यांग व्यक्ति को SDM के सामने पेश किया गया था। आरोप है कि इसी दौरान SDM नाराज हो गए और होमगार्ड्स को जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया। होमगार्ड्स का कहना है कि SDM ने अपने गनर और ड्राइवर को आदेश दिया कि उनसे जबरन दौड़ लगवाई जाए और सिट-अप करवाए जाएं, साथ ही उनकी तस्वीरें खींचकर भेजी जाएं। होमगार्ड्स ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद उन्हें ड्यूटी स्थल से भगा दिया गया और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। शिकायत में यह बात भी कही गई है कि उनसे लगातार 24 से 48 घंटे तक बिना आराम के ड्यूटी करवाई जाती है, जो मानसिक और शारीरिक रूप से उन्हें तोड़ रही है।
न्याय न मिलने पर आत्मघाती कदम की चेतावनी, प्रशासन को दी गई शिकायत
होमगार्ड रमाकांत मिश्रा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि उन्होंने जिला कमांडेंट, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और मुख्यमंत्री तक शिकायत भेजी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यदि SDM को निलंबित नहीं किया गया और उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे मजबूर होकर आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर विचार कर सकते हैं। इस बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया है। जिला होमगार्ड कमांडेंट ताज रसूल ने पुष्टि की है कि उन्हें तीनों होमगार्ड्स की शिकायत मिली है। उन्होंने बताया कि शिकायत को जिलाधिकारी के पास भेजा जाएगा और वहीं से जांच समिति बनाने का फैसला लिया जाएगा।
SDM आलोक प्रसाद का पक्ष और उनका परिचय
SDM आलोक प्रसाद ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि पूरी घटना को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। SDM के अनुसार, एक दिव्यांग व्यक्ति उनके कक्ष में घिसटते हुए आया था और कुर्सी पर बैठते समय गिरते-गिरते बचा। उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद होमगार्ड्स मूकदर्शक बने बैठे रहे और किसी तरह की मदद नहीं की। इसी बात पर उन्होंने होमगार्ड्स को केवल संवेदनशीलता की कमी को लेकर फटकार लगाई थी। SDM का कहना है कि उन्होंने न तो किसी को गाली दी और न ही कोई अन्य आदेश दिया। आलोक प्रसाद 2022 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी हैं। उनका जन्म 10 जनवरी 1994 को हुआ बताया जाता है, हालांकि कुछ स्रोत 1 अक्टूबर 1994 भी बताते हैं। वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आजमगढ़/मथुरा से हैं। उन्होंने इंडस्ट्रियल बायोटेक्नोलॉजी में एमएससी की पढ़ाई की है और कुछ जगहों पर बीटेक डिग्री का भी उल्लेख मिलता है। उन्होंने 29 अगस्त 2022 को प्रशासनिक सेवा जॉइन की थी और वर्तमान में बहराइच में जॉइंट मजिस्ट्रेट और SDM के रूप में तैनात हैं। जून 2025 में वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित दौरे से पहले हुए एक सुरक्षा चूक मामले की जांच को लेकर भी चर्चा में आए थे, जिसमें बिना सूचना विस्फोटक इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया था। फिलहाल दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच जिला प्रशासन द्वारा जांच कराए जाने की संभावना है, जिसके बाद ही यह तय होगा कि आरोप सही हैं या नहीं और आगे क्या कार्रवाई होगी।
