नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 सितम्बर 2025) को एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ़ कहा कि जो आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार उम्र, फीस जैसी छूट का लाभ लेकर आवेदन करते हैं, उन्हें बाद में सामान्य (General) श्रेणी की सीटों पर चयनित नहीं किया जा सकता—अगर भर्ती नियमों में ऐसा स्पष्ट रूप से मना किया गया हो। यह मामला स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) की कांस्टेबल (GD) भर्ती से जुड़ा हुआ था।
मामला कैसे शुरू हुआ?
SSC की इस भर्ती में आयु सीमा 18–23 वर्ष तय थी। ओबीसी उम्मीदवारों को इसमें 3 साल की आयु छूट दी गई थी। कुछ उम्मीदवारों ने इस छूट का फायदा उठाकर आवेदन किया। उन्होंने परीक्षा में सामान्य वर्ग के अंतिम चयनित उम्मीदवार से ज्यादा अंक प्राप्त किए, लेकिन अपने ही वर्ग (OBC) के अंतिम चयनित उम्मीदवार से कम अंक होने की वजह से चयनित नहीं हो पाए।n इसके बाद वे चाहते थे कि चूंकि उन्होंने सामान्य वर्ग से अधिक अंक लिए हैं, इसलिए उन्हें General सीटों पर चयन का अधिकार दिया जाए। उम्मीदवारों ने इस मामले को हाईकोर्ट में उठाया। हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया और कहा कि मेरिट के आधार पर उन्हें सामान्य वर्ग की सीटों पर चयनित माना जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में जितेंद्र कुमार सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2010) के फैसले का सहारा लिया।
सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट
भारत सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। मामला जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ के सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया और साफ कहा कि हाईकोर्ट ने 2010 के जिस केस का सहारा लिया था, उसमें उत्तर प्रदेश के विशेष कानूनी प्रावधान लागू थे, जबकि मौजूदा भर्ती में जारी कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) साफ तौर पर कहता है कि छूट पाने वाले उम्मीदवार सामान्य वर्ग की सीट पर चयनित नहीं हो सकते।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस बागची ने सुनवाई के दौरान कहा – “आरक्षित उम्मीदवार, जिन्होंने फीस/ऊपरी आयु सीमा में छूट लेकर सामान्य उम्मीदवारों के साथ प्रतिस्पर्धा की है, उन्हें सामान्य वर्ग की सीटों पर नियुक्त किया जा सकता है या नहीं, यह भर्ती नियमों पर निर्भर करता है। अगर नियमों में रोक नहीं है, तो ऐसे उम्मीदवार सामान्य वर्ग की सीट पर चयन का दावा कर सकते हैं। लेकिन जहां स्पष्ट रोक है, वहां यह संभव नहीं।”
पुराने फैसलों का हवाला
अदालत ने सौरव यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2020) मामले का भी हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि उम्मीदवार तभी General सीटों पर स्थानांतरित (Migration) हो सकते हैं, जब उन्होंने परीक्षा में कोई विशेष छूट न ली हो और भर्ती नियमों में इसकी इजाज़त हो। चूंकि मौजूदा SSC भर्ती में स्थानांतरण पर साफ़ रोक थी, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि उम्मीदवारों को General सीटों पर नहीं माना जा सकता। अदालत ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए सरकार की अपील को मंज़ूर कर लिया। इस प्रकार, ओबीसी उम्मीदवारों को, जिन्होंने आयु सीमा में छूट लेकर परीक्षा दी थी, सामान्य सीटों पर चयन का लाभ नहीं दिया जाएगा।
