दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: EWS उम्मीदवारों को नहीं मिलेगा SC/ST/OBC जैसी छूट का लाभ

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 अप्रैल 2026 को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवारों को केंद्रीय सरकारी नौकरियों की भर्तियों में SC, ST और OBC वर्गों की तरह उम्र में छूट (Age Relaxation) और अतिरिक्त प्रयास (Attempts) का लाभ नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि आर्थिक कमजोरी और सामाजिक पिछड़ापन दोनों अलग-अलग चीजें हैं, इसलिए इन दोनों को एक समान नहीं माना जा सकता।

EWS की मांग खारिज, UPSC नियमों को कोर्ट ने सही ठहराया

यह फैसला जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने सुनाया। EWS वर्ग के कुछ उम्मीदवारों ने याचिका दायर कर मांग की थी कि उन्हें भी UPSC जैसी परीक्षाओं में SC/ST/OBC की तरह उम्र में छूट और ज्यादा प्रयासों का मौका दिया जाए। फिलहाल UPSC के नियमों के अनुसार, SC/ST वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम 5 साल की उम्र में छूट मिलती है, जबकि OBC उम्मीदवारों को 3 साल की छूट दी जाती है। इसके अलावा, इन वर्गों को परीक्षा में बैठने के लिए ज्यादा प्रयासों की अनुमति भी मिलती है। लेकिन EWS वर्ग को इस तरह की कोई अतिरिक्त छूट नहीं दी जाती। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में EWS उम्मीदवारों को उम्र में छूट दी जा रही है, इसलिए केंद्र सरकार को भी ऐसा करना चाहिए। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि राज्यों की नीतियां केंद्र सरकार पर लागू नहीं होतीं। हर सरकार अपनी जरूरत और नीतियों के अनुसार फैसले ले सकती है।

सामाजिक पिछड़ापन बनाम आर्थिक कमजोरी: कोर्ट ने बताया बड़ा अंतर

कोर्ट ने अपने फैसले में SC, ST और OBC वर्गों की स्थिति और EWS वर्ग के बीच स्पष्ट अंतर बताया। कोर्ट ने कहा कि SC/ST/OBC वर्गों को जो समस्याएं होती हैं, वे केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़ी होती हैं, जो लंबे समय से चली आ रही हैं। इन वर्गों को अक्सर भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जाति जन्म से तय होती है और इसे बदला नहीं जा सकता, जबकि आर्थिक स्थिति समय के साथ बदल सकती है। यानी कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से कमजोर आज हो सकता है, लेकिन भविष्य में उसकी स्थिति बेहतर हो सकती है। इसी आधार पर कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि EWS और SC/ST/OBC वर्गों की समस्याएं एक जैसी नहीं हैं, इसलिए उन्हें एक जैसी छूट देना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई मौजूदा व्यवस्था न तो मनमानी है और न ही असंवैधानिक। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि EWS उम्मीदवार SC/ST/OBC की तरह उम्र में छूट और अतिरिक्त प्रयास की मांग नहीं कर सकते।

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