लातूर (महाराष्ट्र) में OBC युवक ने मराठा आरक्षण विवाद को लेकर दी जान, परिवार और समुदाय में ग़म

लातूर: महाराष्ट्र के लातूर ज़िले के वंगदारी गाँव में 35 वर्षीय ओबीसी युवक ने कथित रूप से मराठा आरक्षण को लेकर आत्महत्या कर ली। यह घटना 11 सितंबर 2025 की शाम हुई, जब युवक ने मंजर नदी में छलांग लगाकर जान दे दी। घटना के बाद इलाके में तनाव है, क्योंकि मृतक ने जो सुसाइड नोट छोड़ा है उसमें सरकार के 2 सितंबर को जारी किए गए GR (सरकारी परिपत्र) को आत्महत्या का कारण बताया गया है।

घटना कैसे हुई

पुलिस के अनुसार युवक वंजारी (OBC) समुदाय से था। गुरुवार की शाम वह मंजर नदी के किनारे गया, अपने कपड़े उतारे और नदी में छलांग लगा दी। थोड़ी देर बाद उसकी मौत हो गई। उसके कपड़ों की जेब से एक नोट बरामद हुआ है। पुलिस अभी इस बात की जांच कर रही है कि वह नोट वास्तव में मृतक ने ही लिखा है या नहीं। लातूर एसपी अमोल तांबे ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया गया है, लेकिन जांच गहराई से की जा रही है।

सुसाइड नोट में क्या लिखा था

मृतक ने जो नोट छोड़ा, उसमें सीधे तौर पर सरकार के 2 सितंबर 2025 को जारी GR को आत्महत्या का कारण बताया गया है। नोट में लिखा है कि सरकार ने मराठा समाज को कुंभी प्रमाणपत्र देकर ओबीसी समाज के साथ धोखा किया है। उसने लिखा — “आपने ओबीसी समाज को धोखा दिया है। मेरी मौत के बाद उम्मीद है कि मेरे समाज को न्याय मिलेगा।” स्थानीय संगठन ‘समता परिषद’ के शहर प्रमुख पद्माकर वाघमारे ने बताया कि मृतक इस GR के बाद गहरे सदमे में था और अपने बच्चों के भविष्य को लेकर बहुत चिंतित था। उसके पीछे तीन बेटियाँ और एक बेटा है।

परिवार और समुदाय की प्रतिक्रिया

मृतक के परिवार का कहना है कि वह कई दिनों से परेशान था और लगातार बच्चों के भविष्य को लेकर डर में जी रहा था। परिवार अब सरकार से आर्थिक मदद और विधवा को नौकरी देने की मांग कर रहा है। वहीं, लातूर के स्थानीय ओबीसी नेताओं ने कहा कि यह घटना समुदाय की चिंता को दर्शाती है और अगर सरकार ने GR वापस नहीं लिया तो वे आंदोलन शुरू करेंगे। समुदाय ने साफ कहा है कि यह फैसला उनके आरक्षण अधिकारों पर सीधा हमला है।

सरकार और नेताओं की प्रतिक्रिया

घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और ओबीसी नेता छगन भुजबळ ने ऐलान किया कि वे शुक्रवार (12 सितंबर) को मृतक के परिवार से मिलने वंगदारी गाँव जाएंगे। उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए वे कोर्ट का दरवाज़ा भी खटखटाएँगे। उधर, भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने अपील की कि समाज को ओबीसी बनाम मराठा के रूप में न बाँटा जाए। पुलिस ने भी कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच की जाएगी और सुसाइड नोट की हस्तलिपि का मिलान कराया जाएगा।

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