क्या IAS अधिकारियों के बच्चों को मिलना चाहिए आरक्षण? सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल

नई दिल्ली: देश में आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान यह अहम सवाल उठाया कि जो परिवार आरक्षण का लाभ लेकर आर्थिक और शैक्षणिक रूप से मजबूत हो चुके हैं, उनके बच्चों को अब भी आरक्षण की जरूरत क्यों है। अदालत ने साफ कहा कि सामाजिक उन्नति (social mobility) का मतलब यही है कि ऐसे परिवार धीरे-धीरे आरक्षण प्रणाली से बाहर आएं।

क्रीमी लेयर और आरक्षण पर अदालत की चिंता

सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने खास तौर पर उन मामलों पर सवाल उठाया, जहां माता-पिता दोनों ही IAS अधिकारी हैं और फिर भी उनके बच्चे आरक्षण का लाभ लेना चाहते हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से काफी मजबूत स्थिति में होते हैं, इसलिए उन्हें आरक्षण की जरूरत पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब किसी परिवार को शिक्षा और नौकरी के जरिए उन्नति मिल जाती है, तो बार-बार आरक्षण लेने से यह व्यवस्था कभी खत्म नहीं हो पाएगी। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार द्वारा बनाए गए नियमों में पहले से ही कुछ उच्च पदों पर बैठे लोगों के बच्चों को क्रीमी लेयर में रखकर आरक्षण से बाहर किया गया है, फिर भी इन नियमों को चुनौती दी जा रही है।

EWS और क्रीमी लेयर पर बहस, 1992 के फैसले का जिक्र

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वकील शशांक रत्नू ने दलील दी कि क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल आय के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक स्थिति के आधार पर भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और क्रीमी लेयर के बीच स्पष्ट अंतर होना जरूरी है। इस पर अदालत ने कहा कि EWS में केवल आर्थिक कमजोरी देखी जाती है, जबकि क्रीमी लेयर में सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक संतुलन बनाना जरूरी है, क्योंकि जब माता-पिता आरक्षण का लाभ लेकर एक उच्च स्तर तक पहुंच जाते हैं, तो उनकी स्थिति बदल जाती है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। साथ ही, 1992 के ऐतिहासिक इंद्रा साहनी (मंडल) फैसले का भी जिक्र हुआ, जिसमें OBC के लिए 27% आरक्षण को सही ठहराया गया था, लेकिन क्रीमी लेयर को इससे बाहर रखने की बात कही गई थी। फिलहाल, OBC में क्रीमी लेयर की पहचान के लिए सालाना आय सीमा 8 लाख रुपये तय है, लेकिन कुछ मामलों में माता-पिता के पद और स्थिति के आधार पर भी बच्चों को आरक्षण से बाहर किया जाता है। हाल ही में मार्च में दिए गए एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि केवल आय के आधार पर किसी को क्रीमी लेयर में नहीं रखा जा सकता, बल्कि माता-पिता के पद और सामाजिक स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

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