मेघालय ने स्टारलिंक के साथ मिलकर दूरदराज़ पहाड़ी क्षेत्रों में सैटेलाइट इंटरनेट पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया

शिलांग: मेघालय में डिजिटल खाई (Digital Divide) को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मेघालय सरकार ने स्टारलिंक इंडिया के साथ एक लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत राज्य के दूरदराज़ और पहाड़ी क्षेत्रों में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। बुधवार को हुए इस समझौते का उद्देश्य उन इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या को दूर करना है, जहां लंबे समय से शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

पहाड़ी इलाकों में कनेक्टिविटी की बड़ी चुनौती और नया समाधान

मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने बताया कि मेघालय का भौगोलिक ढांचा काफी कठिन और पहाड़ी है, जिसके कारण पारंपरिक टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे टावर और केबल बिछाना महंगा और मुश्किल साबित होता है। यही वजह है कि राज्य के कई क्षेत्रों में अब भी इंटरनेट की पहुंच बहुत सीमित है या बिल्कुल नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्टारलिंक की लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट तकनीक इस समस्या का प्रभावी समाधान बन सकती है। यह तकनीक बिना ज्यादा जमीन पर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए सीधे सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट उपलब्ध कराती है, जिससे दूर-दराज़ क्षेत्रों में भी तेज इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह जांचा जाएगा कि सैटेलाइट इंटरनेट कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में कितना भरोसेमंद और प्रभावी है। अगर यह सफल रहता है, तो भविष्य में इसे पूरे राज्य में बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि यह मॉडल देश के आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) और सीमावर्ती क्षेत्रों में भी कनेक्टिविटी सुधारने में मदद कर सकता है।

अभी शुरू नहीं हुई हैं सेवाएं, कई मंजूरी बाकी

हालांकि, स्टारलिंक ने अभी तक भारत में अपनी व्यावसायिक सेवाएं शुरू नहीं की हैं। कंपनी को इसके लिए सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का आवंटन प्राप्त करना होगा, सुरक्षा से जुड़ी सभी शर्तों को पूरा करना होगा और आवश्यक ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अर्थ स्टेशन (Earth Stations) स्थापित करने होंगे। इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही सेवाएं पूरी तरह से शुरू हो पाएंगी। इस समझौते के दौरान स्पेसएक्स की प्रेसिडेंट ग्विन शॉटवेल भी मौजूद रहीं और उन्होंने मेघालय सरकार की इस पहल की सराहना की। उन्होंने इसे नई तकनीक अपनाने की दिशा में एक दूरदर्शी कदम बताया। हालांकि इस समझौते से जुड़े वित्तीय पहलुओं का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव सम्पत कुमार ने इस समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए।

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