मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने अनुसूचित जाति (दलित) और नव-बौद्ध समुदाय के युवाओं को सेना और पुलिस भर्ती के लिए तैयार करने के उद्देश्य से विशेष प्री-रिक्रूटमेंट प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इस योजना के तहत युवाओं को पेशेवर शारीरिक प्रशिक्षण और राइफल चलाने की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वर्दीधारी सेवाओं में उनके चयन की संभावना बढ़ सके। यह कार्यक्रम सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग, महाराष्ट्र के माध्यम से चलाया जा रहा है। इसमें 3 महीने का आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें सेना और पुलिस भर्ती जैसी वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार तैयारी कराई जाएगी।
प्रशिक्षण में क्या-क्या सिखाया जाएगा
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में युवाओं को दौड़, सहनशक्ति और ताकत बढ़ाने वाले अभ्यास कराए जाएंगे। इसके साथ ही हाई जंप और लॉन्ग जंप की नियमित प्रैक्टिस कराई जाएगी। प्रतिभागियों को राइफल चलाने की ट्रेनिंग और हथियारों की बुनियादी जानकारी भी दी जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान अनुशासन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और सभी प्रतिभागियों को निर्धारित दिनचर्या का पालन करना होगा। युवाओं को रहने की सुविधा भी दी जाएगी और उनकी दैनिक दिनचर्या सेना और पुलिस भर्ती की तरह रखी जाएगी, ताकि वे वास्तविक भर्ती प्रक्रिया के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें। सरकार का मानना है कि इस तरह की व्यवस्थित तैयारी से अनुसूचित जाति और नव-बौद्ध समुदाय के युवाओं की सेना और पुलिस में भागीदारी बढ़ेगी। इस योजना को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित राज्य नेतृत्व का समर्थन मिला है। उन्होंने सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया है।

पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और विवाद
महाराष्ट्र के अनुसूचित जाति और नव-बौद्ध वर्ग के पात्र युवा अपने जिले के सामाजिक न्याय कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें सहायक आयुक्त से संपर्क करना होगा। आवेदन के समय जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, शैक्षणिक दस्तावेज और मेडिकल फिटनेस से जुड़े कागजात जमा करने होंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्यक्रम केवल भर्ती की तैयारी ही नहीं कराएगा, बल्कि युवाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन और सरकारी सेवाओं में करियर बनाने के अवसर भी बढ़ाएगा। यदि इस योजना को बड़े स्तर पर लागू किया गया तो इन समुदायों के युवाओं की भर्ती में सफलता दर काफी बढ़ सकती है। हालांकि कुछ लोगों ने इस योजना पर सवाल भी उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि दलित और नव-बौद्ध युवाओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना सामान्य वर्ग के उन युवाओं के लिए असमान अवसर पैदा कर सकती है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं लेकिन जाति के आधार पर इस योजना का लाभ नहीं ले सकते। आलोचकों के अनुसार सेना और पुलिस भर्ती में सभी उम्मीदवारों के लिए शारीरिक और मेरिट के मानक समान होते हैं। ऐसे में केवल कुछ सामाजिक वर्गों को सरकारी आवासीय कोचिंग, पेशेवर प्रशिक्षक और राइफल प्रशिक्षण देना प्रतिस्पर्धा में असमानता पैदा कर सकता है। अन्य समुदायों के युवाओं को अक्सर महंगी निजी कोचिंग या स्वयं तैयारी करनी पड़ती है। इसी कारण कुछ लोगों का सुझाव है कि आर्थिक रूप से कमजोर सभी वर्गों के युवाओं को भी ऐसी प्रशिक्षण सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि प्रतियोगिता में समान अवसर मिल सकें और सामाजिक न्याय का उद्देश्य भी पूरा हो सके।
