रोहतास: बिहार से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ सिर्फ 9 साल के एक बच्चे पर एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दिया गया। यह मामला बच्चों के बीच हुई मारपीट से जुड़ा है, लेकिन जब यह केस सुनवाई के लिए पहुँचा तो कानूनी प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगे। मामला सामने आने के बाद लोग इसे कानून के संभावित दुरुपयोग और पुलिस की लापरवाही से जोड़कर देख रहे हैं।
बच्चों की लड़ाई से शुरू हुआ मामला, SC/ST एक्ट में दर्ज हुई FIR
यह घटना दिसंबर 2025 की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, बच्चों के बीच मारपीट हुई थी। इसके बाद बच्चे की माँ ने नौहट्टा थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई। शिकायत में 4 बच्चों समेत कुछ अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। आरोप लगाया गया कि मारपीट के दौरान गाली-गलौज भी की गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करते हुए एससी/एसटी एक्ट समेत अन्य धाराएँ लगा दीं। खास बात यह है कि जिन बच्चों पर केस दर्ज किया गया, उनमें से एक की उम्र महज 9 साल बताई जा रही है। यही बिंदु आगे चलकर पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने जताई नाराजगी, 24 घंटे में माँगा स्पष्टीकरण
गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को जब यह मामला सुनवाई के लिए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड पहुँचा, तो वहाँ मौजूद अधिकारियों ने बच्चे की उम्र देखकर हैरानी जताई। मजिस्ट्रेट अमित पांडेय ने जब दस्तावेज देखे तो पाया कि बच्चे की उम्र करीब 9 से 10 साल के बीच है। बोर्ड ने प्राथमिकी की समीक्षा की तो कई खामियाँ सामने आईं। FIR में बच्चों और वयस्कों की उम्र सही तरीके से दर्ज नहीं की गई थी। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए बोर्ड ने नाराजगी जताई। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने बच्चे को उसके अभिभावक के पास भेजने का निर्देश दिया। साथ ही नौहट्टा थानाध्यक्ष को 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया गया। इस पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इतनी कम उम्र के बच्चे पर इस तरह के सख्त कानून के तहत मामला दर्ज करना उचित था, और क्या जांच प्रक्रिया में जरूरी सावधानियाँ बरती गई थीं या नहीं।
