प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के पावन स्नान पर रविवार को हालात उस समय बिगड़ गए, जब ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को संगम जाने से पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद उनके शिष्यों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया, एक साधु के साथ मारपीट के आरोप लगे और शंकराचार्य की पालकी को जबरन खींचते हुए संगम से करीब एक किलोमीटर दूर ले जाया गया। इस पूरे घटनाक्रम के कारण शंकराचार्य मौनी अमावस्या का स्नान नहीं कर सके। घटना से आहत होकर उन्होंने अपने शिविर में धरना शुरू कर दिया, मौन व्रत धारण किया और अन्न-जल त्यागने की घोषणा कर दी।
मौनी अमावस्या पर स्नान के दौरान कैसे भड़का विवाद
रविवार को मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। सुबह से ही करोड़ों लोग संगम में डुबकी लगा रहे थे। इसी बीच शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी में सवार होकर संगम स्नान के लिए निकले। पुलिस और मेला प्रशासन का कहना है कि उस समय संगम नोज और आसपास के घाटों पर अत्यधिक भीड़ थी। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग स्नान कर रहे थे और भगदड़ की आशंका बनी हुई थी। इसी को देखते हुए पुलिस ने शंकराचार्य से पालकी से उतरकर पैदल जाने का अनुरोध किया। शंकराचार्य के शिष्यों ने इसका विरोध किया और कहा कि वे परंपरा के अनुसार पालकी के साथ ही स्नान करेंगे। इसी बात पर पुलिस और शिष्यों के बीच पहले तीखी बहस हुई, फिर धक्का-मुक्की शुरू हो गई। आरोप है कि इसी दौरान बैरिकेडिंग तोड़ी गई और वापसी मार्ग पर जाम जैसी स्थिति बन गई, जिससे आम श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पुलिस कार्रवाई, हिरासत और साधु की पिटाई के आरोप
झड़प बढ़ने पर पुलिस ने शंकराचार्य के कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों और शिष्यों का आरोप है कि पुलिस ने एक साधु को घसीटते हुए चौकी में ले जाकर पीटा। कुछ वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी साधु को टेंट के अंदर ले जाते और थप्पड़ मारते हुए दिखाई दिए। शिष्यों का कहना है कि संतों के साथ बर्बरता की गई और उन्हें गिरा-गिराकर मारा गया। शंकराचार्य ने मौके पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बड़े-बड़े अधिकारी साधु-संतों को पीट रहे थे, जिसे उन्होंने अपनी आंखों से देखा। उन्होंने कहा कि वे तो वापस लौटने का फैसला कर चुके थे, लेकिन जब संतों पर हमला होते देखा तो उन्होंने तय किया कि अब बिना स्नान किए नहीं जाएंगे। अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की और हाथ जोड़कर अनुरोध भी किया, लेकिन शंकराचार्य अपने शिष्यों को छोड़े जाने की मांग पर अड़े रहे। करीब दो घंटे तक संगम क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
पालकी खींचकर ले गई पुलिस, शंकराचार्य का धरना और गंभीर आरोप
स्थिति काबू में नहीं आने पर पुलिस ने शंकराचार्य के कुछ और समर्थकों को हिरासत में लिया और उनकी पालकी को खींचते हुए संगम से लगभग एक किलोमीटर दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप टूटने की भी बात सामने आई। शंकराचार्य संगम तक नहीं पहुंच सके और मौनी अमावस्या का स्नान नहीं कर पाए। इसके बाद वे अपने शिविर लौट आए और वहीं धरने पर बैठ गए। शंकराचार्य ने ऐलान किया कि जब तक प्रशासन उन्हें ससम्मान और पूरे प्रोटोकॉल के साथ संगम नहीं ले जाता, तब तक वे गंगा स्नान नहीं करेंगे। उन्होंने मौन व्रत धारण कर लिया और अन्न-जल का त्याग कर दिया। उनका आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई सरकार के इशारे पर हुई है, क्योंकि उन्होंने पहले महाकुंभ में हुई भगदड़ के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा कि प्रशासन बदले की भावना से संतों को परेशान कर रहा है और यह सनातन परंपरा का अपमान है।
प्रशासन का पक्ष, राजनीतिक-धार्मिक प्रतिक्रियाएं और मेले की स्थिति
प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि शंकराचार्य बिना अनुमति और तय व्यवस्था के विपरीत पालकी पर संगम जाने की कोशिश कर रहे थे। उस समय संगम पर अत्यधिक भीड़ थी। बार-बार अनुरोध के बावजूद वे नहीं माने और उनके समर्थकों ने बैरिकेडिंग तोड़ी तथा पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल और पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने भी कहा कि करीब 200 समर्थकों के साथ शंकराचार्य बैरियर तोड़कर संगम नोज की ओर बढ़े, जिससे पीक समय में अव्यवस्था फैल गई। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। घटना के बाद संत समाज और राजनीति में भी हलचल मच गई। कंप्यूटर बाबा शंकराचार्य के समर्थन में जमीन पर लेटकर धरने पर बैठ गए और प्रशासन से सार्वजनिक माफी की मांग की। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस घटना को अक्षम्य बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि धर्म और अध्यात्म की नगरी में इस तरह का व्यवहार संत समाज का अपमान है। उधर, मौनी अमावस्या पर माघ मेले में भारी भीड़ उमड़ी रही। शाम तक 3.8 से 4.5 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम में स्नान करने का दावा किया गया। 800 हेक्टेयर में फैले मेला क्षेत्र को 7 सेक्टरों में बांटा गया था। 8 किलोमीटर तक अस्थायी घाट बनाए गए थे और AI कैमरे, CCTV तथा ड्रोन से निगरानी की जा रही थी। इतनी बड़ी भीड़ के बीच शंकराचार्य और पुलिस के बीच हुआ यह विवाद पूरे दिन माघ मेले की सबसे बड़ी और सबसे चर्चित घटना बना रहा।
