अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के हस्तपुर गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासन और समाज दोनों को हिलाकर रख दिया है। यहां की रहने वाली चंद्रावती देवी और उनके परिवार पर आरोप है कि उन्होंने पिछले दस सालों में SC/ST एक्ट और सरकारी योजनाओं का गलत इस्तेमाल कर करीब 46 लाख रुपये हासिल किए। यह खुलासा सामने आने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को जांच के लिए सौंपा है।
महिला आयोग ने की कार्रवाई, SC/ST आयोग को सौंपा मामला
राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य डॉ. अर्चना मजूमदार ने इस मामले को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना को पत्र लिखकर सौंपा है। पत्र में साफ कहा गया है कि चंद्रावती देवी और उनके परिवार ने SC/ST एक्ट के तहत बार-बार झूठे मुकदमे दर्ज कराए और हर बार सरकारी मुआवजा लिया। अलीगढ़ पुलिस की रिपोर्ट में भी यह खुलासा हुआ है कि इस परिवार पर पिछले दस सालों में 15 अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए। इन मामलों के आधार पर ही उन्होंने योजनाओं का फायदा उठाकर बड़ी रकम वसूली।
कानून का दुरुपयोग और कड़ी सजा का प्रावधान
SC/ST (Prevention of Atrocities) Act का मकसद समाज के कमजोर वर्गों को सुरक्षा और सहायता देना है, लेकिन जब कोई इस कानून का गलत इस्तेमाल करता है तो यह अपराध बन जाता है। कानून के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति झूठे आरोप लगाकर मुकदमा करता है, तो उसे छह महीने से सात साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा अगर वित्तीय गड़बड़ी साबित होती है, तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत भी सजा हो सकती है, जिसमें सात साल तक की कैद और संपत्ति जब्ती का प्रावधान है।
जनता का गुस्सा और पुराने मामले
यह मामला सामने आने के बाद आम लोगों में गुस्सा है। आगरा निवासी रामवीर सिंह ने कहा कि ऐसे लोग असली पीड़ितों का हक मारते हैं, जिन्हें सच में मदद की जरूरत होती है। अलीगढ़ की शीला देवी का कहना है कि सरकार को इस तरह की धांधली रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता राजेश कुमार ने बताया कि यह पहली बार नहीं है, बल्कि 2018 में भी अलीगढ़ में एक दलित परिवार पर 10 झूठे केस दर्ज कर करीब तीन लाख रुपये लेने का आरोप लगा था। तब भी पुलिस ने पाया था कि वह परिवार बार-बार SC/ST एक्ट का सहारा लेकर मुआवजा वसूल रहा था।
अब NCSC की होगी सख्त जांच
राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले की सभी रिपोर्ट और दस्तावेज राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को सौंप दिए हैं। अब यह आयोग अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल कर जांच करेगा। NCSC के पास सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां हैं, जिनके तहत वह किसी भी व्यक्ति को समन भेज सकता है, दस्तावेज मांग सकता है और गवाहों से शपथ पर पूछताछ कर सकता है। NCSC के अध्यक्ष किशोर मकवाना पहले भी कह चुके हैं कि योजनाओं के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे में उम्मीद है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब भी इस तरह योजनाओं का दुरुपयोग होता है, तब असली पीड़ित न्याय और सहायता से वंचित रह जाते हैं। अब सबकी निगाहें राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग पर हैं कि वह इस मामले में कितनी तेजी से जांच कर कार्रवाई करता है। अगर चंद्रावती देवी और उनका परिवार दोषी पाया जाता है तो यह SC/ST एक्ट के गलत इस्तेमाल पर एक बड़ी मिसाल बन सकती है।
