सिंगरौली: मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है। सिंगरौली जिले में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव और नेता भास्कर मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने देवसर से भाजपा विधायक राजेंद्र मेश्राम के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी की थी। इस मामले में पुलिस ने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 के तहत केस दर्ज किया है। आरोपी को 25 सितंबर को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद
घटना की शुरुआत 12 सितंबर 2025 को हुई, जब भास्कर मिश्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो में कथित तौर पर उन्होंने भाजपा विधायक राजेंद्र मेश्राम के खिलाफ अपमानजनक और जातिसूचक टिप्पणी की थी। यह वीडियो सामने आते ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर प्रदर्शन किया और कठोर कार्रवाई की मांग की। धीरे-धीरे यह मामला तूल पकड़ता गया और सियासी बहस का विषय बन गया।
विधायक की शिकायत और केस दर्ज
देवसर से भाजपा विधायक राजेंद्र मेश्राम ने 21 सितंबर को वैढन थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि भास्कर मिश्रा की टिप्पणी से समाज में तनाव और वैमनस्य फैल सकता है। इसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 और SC/ST अधिनियम की धारा 3(2)(va) और 3(1)(d) लगाई गई हैं। इन धाराओं में दोषी पाए जाने पर आरोपी को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
गिरफ्तारी और न्यायिक कार्रवाई
पुलिस ने 25 सितंबर को कांग्रेस नेता भास्कर मिश्रा को उनके निवास स्थान पचोखर, वैढन (सिंगरौली) से गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। नगर पुलिस अधीक्षक पुन्नू सिंह परस्ते ने जानकारी दी कि भास्कर मिश्रा के खिलाफ पहले से ही 14 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इससे यह गिरफ्तारी और भी गंभीर मानी जा रही है।
राजनीति में तेज हुआ घमासान
भास्कर मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद सिंगरौली जिले समेत पूरे मध्य प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि किसी को भी जाति आधारित अपशब्द कहने का अधिकार नहीं है और कानून के तहत कार्रवाई होना जरूरी है। वहीं कांग्रेस नेताओं ने इस घटना को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि भास्कर मिश्रा ने केवल सामान्य राजनीतिक टिप्पणी की थी, जिसे भाजपा ने जातिसूचक बनाकर पेश किया ताकि कांग्रेस नेताओं पर दबाव बनाया जा सके।
