सुल्तानपुर में मॉब लिंचिंग की कोशिश: बच्चों के अपहरण के शक में तीन साधुओं की पिटाई, पुलिस जांच में अपहरण का आरोप गलत साबित

उत्तर प्रदेश: सुल्तानपुर जिले में मॉब लिंचिंग की एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। चाचपारा गांव में भगवा वस्त्र धारण किए तीन साधुओं को बच्चों के अपहरण के शक में ग्रामीणों ने घेरकर पीटा। मामला तब तूल पकड़ा, जब प्राथमिक विद्यालय के बच्चों ने बताया कि साधु उन्हें गाड़ी में बैठाकर ले जाने की कोशिश कर रहे थे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हालांकि, पुलिस जांच में अपहरण की पुष्टि नहीं हुई और साधुओं को छोड़ दिया गया।

बच्चों के आरोप से गांव में मचा हड़कंप

घटना लम्भुआ कोतवाली क्षेत्र के चाचपारा गांव की है। 6 दिसंबर की सुबह सत्यम, प्रांजल, आदिति और अंश नाम के बच्चे स्कूल पहुंचे। वहां उन्होंने प्रधानाध्यापिका मीना कुमारी को बताया कि भगवा वस्त्र पहने तीन साधु उन्हें जबरन अपनी गाड़ी में बैठाने की कोशिश कर रहे थे। बच्चों ने इस बात की जानकारी अपने परिजनों को दी, जिसके बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। गांववालों ने साधुओं की कार का पीछा किया और उन्हें घेर लिया। साधुओं को कार से बाहर खींचकर उनकी पिटाई की गई। बच्चों ने आरोप लगाया कि साधुओं के पास नशीली दवाएं थीं, जिनका इस्तेमाल वे बच्चों को बेहोश करने के लिए कर रहे थे।

ग्रामीणों का गुस्सा: साधुओं पर गिरोह होने का शक

गांववालों का कहना था कि साधु बच्चों का अपहरण करने वाले गिरोह के सदस्य हैं। गांव के अमर यादव ने बताया, “सुबह करीब 7 बजे साधु फोर-व्हीलर गाड़ी में आए थे। उन्होंने पहले रास्ता पूछा और फिर बच्चों को स्कूल जाते समय गाड़ी में खींचने की कोशिश की।” एक अन्य ग्रामीण बृजेश यादव ने कहा, “साधु बहाने से बच्चों को गाड़ी में बिठा रहे थे। इनके साथ दो अन्य टू-व्हीलर और गाड़ियां भी थीं, जो गांव के आसपास घूम रही थीं।”

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर साधुओं को बचाया

घटना की सूचना मिलने पर डायल-112 की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने साधुओं को भीड़ से बचाकर लम्भुआ कोतवाली ले गई। साधुओं से पूछताछ में पता चला कि वे नोएडा से प्रयागराज महाकुंभ के लिए जा रहे थे। उनके पास हरियाणा नंबर की कार थी, जो खेरकन सेरखा मठ के कर्मवीर नाथ के नाम पंजीकृत थी। साधुओं की पहचान ओमवीर नाथ, परमेश्वर नाथ और सुमित नाथ के रूप में हुई। पुलिस ने उनके सभी दस्तावेज और पहचान पत्रों को सत्यापित किया। अपर पुलिस अधीक्षक अखंड प्रताप सिंह ने कहा, “साधु नोएडा के रहने वाले हैं और प्रयागराज के लिए निकले थे। बच्चों के अपहरण की पुष्टि नहीं हुई है।”

गांव वालों का आरोप और साधुओं का बचाव

हालांकि, पुलिस जांच में अपहरण का मामला गलत साबित हुआ, लेकिन ग्रामीण अपने आरोपों पर अड़े हैं। उनका कहना है कि साधुओं ने बच्चों को बहला-फुसलाकर गाड़ी में बैठाने की कोशिश की। ग्रामीणों ने दावा किया कि साधुओं के पास नशीली दवाएं थीं, लेकिन पुलिस को ऐसी कोई चीज नहीं मिली। वहीं, साधुओं ने कहा कि वे नोएडा से प्रयागराज जा रहे थे और रास्ता भटक गए थे। 6 दिसंबर की रात वे केएनआईटी के पास हनुमान मंदिर में रुके थे और सुबह चाचपारा गांव के पास पहुंचे।

पुलिस ने साधुओं को छोड़ा, लेकिन केस दर्ज

पुलिस ने तीनों साधुओं को हिरासत में लेकर पूछताछ की और उनकी गाड़ी, मठ और अन्य दस्तावेजों की जांच की। पुलिस के मुताबिक, प्रथम दृष्टया अपहरण का आरोप गलत है। साधुओं को छोड़ दिया गया है, लेकिन ग्रामीणों की शिकायत पर उनके खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। इस घटना के बाद से चाचपारा गांव में तनाव का माहौल है। ग्रामीण अपहरण के आरोपों को लेकर नाराज हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। पुलिस ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है और भरोसा दिलाया है कि मामले की सच्चाई जल्द सामने आएगी।

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