गाजीपुर (UP) में थाने के अंदर पुलिस की लाठीचार्ज से BJP दिव्यांग कार्यकर्ता की मौत, वीडियो वायरल; 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड, 5 लाइन हाजिर

गाजीपुर जिले: उत्तर प्रदेश के नोनहरा थाने में पुलिस की बर्बरता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। थाने में लाइट बंद कराकर बीजेपी कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया गया। इस पिटाई में दिव्यांग कार्यकर्ता सियाराम उपाध्याय गंभीर रूप से घायल हो गए और दो दिन इलाज के बाद गुरुवार को उनकी मौत हो गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसके बाद 11 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई है।

कैसे शुरू हुआ विवाद

यह मामला 9 सितंबर की रात का है। गाजीपुर जिले के रुकन्दीपुर गांव में बिजली का खंभा लगाने को लेकर प्रधान और पूर्व प्रधान पक्ष में विवाद हो गया। विवाद बढ़ने के बाद एक पक्ष के 20–25 लोग अपनी शिकायत लेकर नोनहरा थाने पहुंचे और धरने पर बैठ गए। पुलिस ने समझाया कि यह मामला बिजली विभाग से जुड़ा है और संबंधित विभाग से बात भी की गई, लेकिन लोग नहीं माने। देर रात लगभग डेढ़ बजे अचानक थाने की लाइट चली गई और इसी दौरान पुलिस ने धरने पर बैठे लोगों पर लाठीचार्ज शुरू कर दिया।

दिव्यांग सियाराम क्यों नहीं बच पाए

लाठीचार्ज होते ही लोग अफरा-तफरी में भागने लगे। लेकिन गांव निवासी और बीजेपी कार्यकर्ता सियाराम उपाध्याय दिव्यांग होने के कारण भाग नहीं पाए। वह जमीन पर गिर गए और पुलिस ने उन्हें बेरहमी से पीटा। गांव वालों और साथियों का कहना है कि चार पुलिसकर्मियों ने मिलकर सियाराम को घेरकर पीटा। उनके शरीर पर गंभीर चोटें आईं। घर लौटने पर उनकी हालत बिगड़ गई और दो दिन इलाज के बाद गुरुवार सुबह उनकी मौत हो गई।

परिवार का आरोप – ‘पुलिस ने बेरहमी से पीटा’

मृतक सियाराम के पिता गिरिजा उपाध्याय ने कहा – “मेरा बेटा दिव्यांग था। 9 सितंबर को गांव वालों के साथ थाने गया था। लौटकर आया तो पूरे शरीर पर चोटें थीं। उसने खुद बताया कि पुलिसवालों ने बेरहमी से लाठियों से पीटा।” मां मालती देवी बोलीं – “धरने पर बैठे लोग तो भाग गए, लेकिन मेरा बेटा नहीं भाग पाया। लाठीचार्ज में पुलिस ने उसे बुरी तरह मारा। घर आने के बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती रही और गुरुवार को उसने दम तोड़ दिया।”

BJP जिलाध्यक्ष को लोगों के गुस्से का सामना

बीजेपी जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय ने शुरुआत में सियाराम को पार्टी का कार्यकर्ता मानने से इनकार कर दिया। इससे ग्रामीण और कार्यकर्ता भड़क गए और उन्होंने जमकर विरोध किया। गुरुवार को जब वह मृतक के घर पहुंचे तो लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की। बाद में उन्होंने अपना बयान बदलते हुए स्वीकार किया कि सियाराम बीजेपी का कार्यकर्ता था। इसके बाद ही लोगों का गुस्सा शांत हुआ। इस घटना पर सपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य राजकुमार पांडेय भी मृतक के घर पहुंचे। वे भावुक हो गए और रोते हुए कहा “बीजेपी ने अपने ही कार्यकर्ता को मानने से इनकार कर दिया। यह घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है। ब्राह्मण समाज को अब एकजुट होकर अपनी ताकत दिखानी होगी।”

पुलिसकर्मियों पर बड़ी कार्रवाई

गाजीपुर के एसपी डॉ. ईरज राजा मृतक सियाराम उपाध्याय के घर पहुंचे और परिवार से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच कराई जाएगी और शव का पोस्टमार्टम भी कराया गया है। घटना में शामिल पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की गई है। छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें थाना प्रभारी निरीक्षक वेंकटेश तिवारी, दरोगा अवधेश कुमार राय, हेड कॉन्स्टेबल नागेंद्र सिंह यादव और तीन सिपाही धीरज सिंह, अभिषेक पांडेय और राकेश कुमार शामिल हैं। इसके अलावा, पांच पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है। इनमें दरोगा कमलेश गुप्ता और जुल्फिकार अली, जबकि सिपाही मुलायम सिंह, राघवेंद्र मिश्र और राजेश कुमार शामिल हैं।

मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला

थाने के अंदर लाठीचार्ज का वीडियो सामने आने के बाद इस घटना ने तूल पकड़ लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने यह मामला राज्य मानवाधिकार आयोग में दर्ज कराया है। अब यह घटना उत्तर प्रदेश में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है और दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग हो रही है।

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