नई दिल्ली: दिल्ली में सोमवार, 30 मार्च को सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शब्बीर अहमद लोन को दिल्ली बॉर्डर से गिरफ्तार किया। लोन, जिसे “राजा” और “कश्मीरी” के नाम से भी जाना जाता है, बांग्लादेश में सक्रिय होकर भारत में आतंकी हमलों की साजिश रच रहा था। वह जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर जिले के कंगन का रहने वाला है और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर उसे पकड़ा।
बांग्लादेश से चला रहा था आतंकी नेटवर्क, पाकिस्तान के इशारे पर कर रहा था काम
जांच एजेंसियों के अनुसार शब्बीर अहमद लोन बांग्लादेश में रहकर लश्कर-ए-तैयबा के लिए एंटी-इंडिया गतिविधियों को संचालित कर रहा था। उसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के निर्देश पर काम सौंपा गया था। उसका काम बांग्लादेशी नागरिकों को भर्ती करना और उन्हें भारत में घुसपैठ कराकर आतंकी हमलों के लिए तैयार करना था, ताकि पाकिस्तान की भूमिका छिपी रहे। अधिकारियों ने बताया कि लोन देश विरोधी प्रचार भी फैला रहा था। वह दिल्ली और कोलकाता जैसे शहरों में भड़काऊ और भारत विरोधी पोस्टर लगवाकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा था। इससे पहले 2007 में भी उसे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भारी मात्रा में हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था, जिसमें ग्रेनेड और AK-47 राइफल शामिल थीं। जांच में उसके सीधे संबंध लश्कर के सरगना हाफिज सईद और संगठन के सह-संस्थापक जकी-उर-रहमान लखवी से सामने आए थे। हालांकि 2018 में उसे जमानत मिल गई थी, जिसके बाद वह 2019 में फरार होकर बांग्लादेश चला गया और वहां अपना आतंकी नेटवर्क खड़ा कर लिया। अधिकारियों के मुताबिक उसने मुजफ्फराबाद स्थित आतंकी कैंप में बेसिक और एडवांस ट्रेनिंग ली है और करीब 20 साल से लश्कर के शीर्ष नेतृत्व से जुड़ा रहा है।
दिल्ली और दक्षिण भारत में फैला नेटवर्क, कई ठिकानों की रेकी के वीडियो मिले
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह भी सामने आया है कि लोन का नेटवर्क दिल्ली और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों तक फैला हुआ था। हाल ही में एक लश्कर से जुड़ा मॉड्यूल पकड़ा गया, जिसमें बांग्लादेशी नागरिक शामिल थे। ये लोग भारत में फर्जी पहचान के साथ रह रहे थे और देश विरोधी पोस्टर लगाकर माहौल बिगाड़ने के साथ-साथ आतंकी हमलों की तैयारी कर रहे थे। फरवरी में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में छापेमारी की थी, जहां से मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज, बैंक कार्ड और पाकिस्तान समर्थक पोस्टर बरामद किए गए। जांच में दिल्ली के संवेदनशील इलाकों जैसे लाल किला और धार्मिक स्थलों की रेकी के वीडियो भी मिले हैं, जिससे उनकी बड़ी साजिश का अंदाजा लगाया जा रहा है। एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं, जिसमें फंडिंग के स्रोत, भर्ती के तरीके और संभावित हमलों के टारगेट शामिल हैं। इसके साथ ही सुरक्षा एजेंसियां शेख सज्जाद गुल की भी तलाश कर रही हैं, जो पहले तिहाड़ जेल में बंद था और 2017 में रिहा होने के बाद पाकिस्तान भाग गया। फिलहाल वह लश्कर के फ्रंट संगठन “द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF)” का नेतृत्व कर रहा है और कई आतंकी हमलों में शामिल रहा है, जिनमें पहलगाम हमला भी शामिल है।
Credit: OpIndia
