लखनऊ: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को परशुराम जयंती के अवसर पर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी 2027 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाती है, तो परशुराम जयंती की सरकारी छुट्टी फिर से शुरू की जाएगी। यह बात उन्होंने पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कही।
परशुराम जयंती की छुट्टी और महिला आरक्षण पर सरकार को घेरा
अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी सरकार बनने पर परशुराम जयंती की छुट्टी बहाल करना उनकी सामाजिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी होगी। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर महिला आरक्षण को लेकर निशाना साधा। उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसे लागू करने का तरीका सही नहीं है। उन्होंने कहा कि जब देश में सही और नई जनगणना नहीं हुई है, तो आरक्षण को ठीक से कैसे लागू किया जा सकता है। उनके अनुसार, जाति आधारित जनगणना बहुत जरूरी है, ताकि हर वर्ग को सही प्रतिनिधित्व मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण को लेकर भ्रम पैदा कर रही है और इसे केवल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को “नारी” से “नारा” बनाने की कोशिश हो रही है। परिसीमन के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में आगे नहीं बढ़ पा रही है। उन्होंने पूछा कि महिला आरक्षण को अभी की सीटों पर ही क्यों लागू नहीं किया जा रहा और इसे भविष्य के परिसीमन से क्यों जोड़ा जा रहा है।
छात्र राजनीति, प्रशासनिक मामलों और राजनीतिक माहौल पर भी बोले
अखिलेश यादव ने कहा कि आज भी समाज में कई कारणों से महिलाओं की राजनीति में भागीदारी कम है, इसलिए आरक्षण को सही तरीके से लागू करने के लिए मजबूत तैयारी जरूरी है। उन्होंने फिरोजाबाद में नायब तहसीलदार और जिला अधिकारी के बीच हुए विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि कार्यस्थल पर शोषण के मामलों में सख्त व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके। उन्होंने छात्र राजनीति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छात्र संघ चुनाव बंद होने से लोकतंत्र कमजोर होता है। उनके अनुसार, छात्र राजनीति ही आगे चलकर बड़े नेताओं को तैयार करती है, इसलिए इसे खत्म नहीं किया जाना चाहिए। समाजवादी पार्टी का झंडा जलाने के सवाल पर उन्होंने सीधे किसी पर आरोप नहीं लगाया, लेकिन कहा कि किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। उन्होंने बताया कि लाल रंग केवल पार्टी का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह क्रांति और धार्मिक परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने एक चाय बेचने वाले के मामले का भी जिक्र किया, जहां उनके वहां रुकने के बाद प्रशासन द्वारा कार्रवाई की बात सामने आई। उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहना चाहिए। अंत में अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को केवल नारे देने के बजाय जनगणना, सामाजिक न्याय और सही तरीके से नीतियां लागू करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बड़े फैसले लेने से पहले सही आंकड़ों और सभी वर्गों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है।
