मैथिली ठाकुर बनीं बिहार की सबसे युवा MLA: अलीनगर से बड़ी जीत, कुम्हरार में के.सी. सिन्हा को करारी हार

अलीनगर: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में दो बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक चेहरों ने सुर्खियां बटोरीं। दरभंगा के अलीनगर से बीजेपी की 25 वर्षीय उम्मीदवार मैथिली ठाकुर ने शानदार जीत दर्ज कर बिहार की सबसे युवा विधायक बनने का इतिहास रच दिया। वहीं दूसरी ओर पटना के कुम्हरार में मशहूर गणितज्ञ डॉ. के.सी. सिन्हा को बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा। मिथिला की आवाज़ और शिक्षा जगत के दिग्गज—दोनों की इस चुनावी कहानी ने बिहार की राजनीति को एक नया रंग दिया है।

मिथिला की बेटी ने रचा इतिहास: 25 की उम्र में बिहार की सबसे युवा MLA बनीं मैथिली

अलीनगर सीट से बीजेपी प्रत्याशी मैथिली ठाकुर ने RJD के बिनोद मिश्रा को 12,000 से ज्यादा वोटों से हराकर धमाकेदार जीत दर्ज की। 25 साल की उम्र में विधायक बनने वाली मैथिली इस बार के चुनाव की सबसे बड़ी चर्चित चेहरों में रहीं। सोशल मीडिया से लेकर पूरे मिथिला क्षेत्र तक उनकी जीत को सांस्कृतिक गौरव की जीत बताया जा रहा है। मैथिली का सफर आसान नहीं रहा। बचपन से संगीत साधना में डूबी इस युवा कलाकार को सिंगिंग रियलिटी शोज़ में कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा— Sa Re Ga Ma Pa Lil Champ, Indian Idol Junior—जैसे बड़े मंचों तक पहुंचने की कोशिशें नाकाम रहीं। लेकिन 2017 में ‘Rising Star’ ने उनकी जिंदगी बदल दी। फाइनल तक पहुंचीं और सिर्फ दो वोटों से खिताब चूकर बनीं रनर-अप। यहीं से देशभर में उनकी पहचान बढ़ी। रियाज़, संघर्ष और सोशल मीडिया—इन तीनों ने मिलकर उन्हें मिथिला संस्कृति की सबसे मज़बूत युवा आवाज़ बनाया। अपने भाइयों के साथ बनाई गई उनकी लोकगीत और भजन की वीडियोज़ करोड़ों लोगों तक पहुंचीं। मधुबनी की इस सांस्कृतिक बेटी ने अब राजनीति में भी वह कमाल दिखाया है जिसकी उम्मीद कम लोग कर रहे थे।

संगीत से राजनीति तक: मैथिली का परिवार और शिक्षा-संस्कार

मैथिली का जन्म 25 जुलाई 2000, मधुबनी (बिहार) में संगीत से जुड़े परिवार में हुआ। उनके पिता रमेश ठाकुर शास्त्रीय संगीत से जुड़े हैं और बचपन से ही तीनों बच्चों को संगीत का प्रशिक्षण देते रहे। उनकी मां पूजा ठाकुर परिवार और बच्चों की संगीत यात्रा की रीढ़ मानी जाती हैं। भाई आयाची और ऋषभ के साथ उनकी जुगलबंदी आज भी देशभर में मशहूर है।लोकगीत, क्लासिकल और भजन—मैथिली की आवाज़ ने उन्हें सिर्फ कलाकार नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान का चेहरा बना दिया।

कुम्हरार में गणितज्ञ के.सी. सिन्हा की करारी हार, मतों के बड़े अंतर से पीछे रहे

जहां एक तरफ मैथिली राजनीतिक उड़ान भर रही थीं, वहीं कुम्हरार में शिक्षा जगत के दिग्गज डॉ. के.सी. सिन्हा वोटों के संघर्ष में पिछड़ गए। जन सुराज से मैदान में उतरे सिन्हा को सिर्फ 15,017 वोट मिले, जबकि बीजेपी के संजय कुमार ने 1,00,485 वोट हासिल कर भारी जीत दर्ज की। हार का अंतर 85,000 से भी ज़्यादा रहा। डॉ. सिन्हा को बिहार में शायद ही कोई छात्र हो जिसने उनकी किताबें न पढ़ी हों। गणित की तैयारी हो—कक्षा 10, 12 या JEE—उनकी किताबें छात्रों की पहली पसंद रहीं। चुनाव प्रचार के दौरान भी लोग उन्हें इतना सम्मान देते थे कि कई बार मतदाता उनसे मिलने पर उनके पैर छू लेते थे। लेकिन उनकी लोकप्रियता वोटों में नहीं बदल सकी।

हार के बाद भी नहीं टूटा हौसला: छात्रों के लिए की बड़ी घोषणा

हार के अगले ही दिन डॉ. के.सी. सिन्हा ने घोषणा की कि वे कक्षा 10, 12 और JEE के विद्यार्थियों के लिए पूरी तरह फ्री लाइव क्लासेस शुरू करेंगे।उन्होंने कहा कि— “जो बच्चे आर्थिक मजबूरी के कारण कोचिंग नहीं कर पाते, उन्हें अब मेरी ओर से मुफ्त और बेहतरीन शिक्षा मिलेगी।” वे जल्द ही टाइम-टेबल, प्लेटफॉर्म, नोट्स, डाउट सेशन और टेस्ट सीरीज का पूरा प्लान जारी करेंगे। यह खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर छात्रों में उत्साह बढ़ गया है।

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