वाराणसी: उत्तर प्रदेश के फूलपुर थाना क्षेत्र के नथईपुर गांव में डॉ. भीमराव आंबेडकर के पुतले के साथ दुर्व्यवहार के मामले में पुलिस की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। इस मामले में मुख्य आरोपी शेरू मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद जिस तरह से उसे थाने में डॉ. आंबेडकर के चित्र के सामने माफी मांगने, दंडवत करने और जयकारे लगवाने के लिए मजबूर किया गया, उसे लेकर पुलिस के रवैये पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। घटना का वीडियो सामने आने के बाद इसे बनारस पुलिस का अमानवीय व्यवहार बताया जा रहा है।
पुतले से दुर्व्यवहार, विरोध और गिरफ्तारी की पूरी कहानी
तीन दिन पहले फूलपुर थाना क्षेत्र के नथईपुर गांव में बड़ागांव के करमपुर निवासी वीरेंद्र उर्फ शेरू मिश्रा, गांगकला निवासी गुलाब राजभर और सतीश सिंह पर डॉ. भीमराव आंबेडकर के पुतले पर थूकने और उसे जलाने की कोशिश करने का आरोप लगा था। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया। आजाद समाज पार्टी, बसपा, भीम आर्मी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सहित कई दलों और संगठनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बाबतपुर–जमालापुर मार्ग पर करीब चार घंटे तक चक्का जाम किया। डीसीपी के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष टीम बनाई। गुरुवार को गुलाब राजभर और सतीश सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसके बाद शनिवार सुबह कठिराव चौकी इंचार्ज सत्यजीत सिंह ने शेरू मिश्रा को बाबतपुर चौराहे से उस समय गिरफ्तार किया, जब वह भागने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने बताया कि तीनों आरोपियों के खिलाफ एसटी-एससी एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं।
थाने में माफी, जयकारे और पुलिस के रवैये पर उठते सवाल
गिरफ्तारी के बाद शेरू मिश्रा को थाने लाया गया, जहां डॉ. आंबेडकर के चित्र के सामने उससे सार्वजनिक रूप से माफी मंगवाई गई। शेरू को दंडवत करते हुए, गिड़गिड़ाकर भविष्य में ऐसी गलती न करने की बात कहते और डॉ. आंबेडकर की प्रशंसा करते हुए देखा गया। आरोप है कि इस दौरान उससे जबरन जयकारे भी लगवाए गए। पुलिस ने उसे हथकड़ी लगाकर थाने के आसपास घुमाया, जिसे देखने के लिए बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। इस पूरी कार्रवाई का वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि कानून के तहत कार्रवाई करने के बजाय क्या पुलिस ने आरोपी के साथ अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार किया। जहां एक ओर पुलिस इसे सख्त संदेश देने की कार्रवाई बता रही है, वहीं दूसरी ओर यह बहस तेज हो गई है कि किसी भी आरोपी के साथ धर्म, जाति या विचारधारा के नाम पर इस तरह का व्यवहार कानून और मानवाधिकारों के दायरे में आता है या नहीं। यह मामला अब केवल पुतले के अपमान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर बहस का विषय बन गया है।
