संजौली मस्जिद विवाद: 16 साल पुराने मामले पर फिर बढ़ा तनाव, कोर्ट आदेश के बावजूद कार्रवाई पर सवाल

शिमला: हिमाचल प्रदेश के संजौली इलाके में विवादित मस्जिद का मामला एक बार फिर गरमा गया है। देवभूमि संघर्ष समिति के पदाधिकारी संजौली पुलिस स्टेशन के बाहर 24 घंटे के आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। उनकी तीन प्रमुख मांगें हैं— पुलिस द्वारा दर्ज FIR को वापस लेना, कोर्ट द्वारा अवैध घोषित मस्जिद की बिजली-पानी काटना, और अदालत के आदेशानुसार मस्जिद के ढांचे को पूरी तरह गिराना।समिति के सदस्यों का आरोप है कि अवैध ढांचे पर एक्शन न लेकर उल्टा उन पर केस दर्ज करके उन्हें परेशान किया जा रहा है। अनशन के कारण इलाके में तनाव का माहौल है और लोग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

FIR को लेकर नाराजगी और कोर्ट आदेशों पर सवाल

देवभूमि संघर्ष समिति के सह-सयोजक मदन ठाकुर ने आरोप लगाया कि कोर्ट ने संजौली मस्जिद को अवैध करार देने के बाद भी न तो मस्जिद की बिजली-पानी काटी गई और न ही ढांचा गिराया गया। उन्होंने कहा कि उल्टा शुक्रवार को समिति के लोगों पर FIR दर्ज कर दी गई, जिससे लोग बेहद नाराज हैं। बीते शुक्रवार समिति ने बाहरी राज्यों से आए मुस्लिम लोगों को मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोका था। इस दौरान दोनों समुदाय के बीच बहस भी हुई। कई लोग बिना नमाज पढ़े वापस लौट गए। इसके बाद पुलिस ने तीन महिलाओं समेत छह लोगों पर धार्मिक भावनाएं आहत करने की धाराओं में केस दर्ज किया।
समिति का कहना है कि जिस ढांचे को अदालत ने अवैध घोषित किया है, वहां नमाज कैसे हो सकती है?

16 साल पुराना विवाद: मस्जिद के निर्माण, परमिशन और कोर्ट केस की पूरी कहानी

संजौली मस्जिद का विवाद करीब 16 साल पुराना है। स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों का कहना है कि मस्जिद का निर्माण बिना किसी अनुमति के किया गया था और यह जमीन वक्फ बोर्ड की भी नहीं है। इसी वजह से मामले को लेकर लगातार विरोध होता रहा और यह विवाद सालों तक कोर्ट में अटका रहा। यह पूरा मामला निगम आयुक्त की कोर्ट में 16 साल तक चला, जहां 50 से अधिक बार सुनवाई हुई। आखिरकार हाईकोर्ट के निर्देश के बाद 3 मई 2025 को निगम आयुक्त ने मस्जिद को पूरी तरह अवैध घोषित करते हुए ढांचा हटाने का आदेश जारी किया। इससे पहले 5 अक्टूबर 2024 को मस्जिद की ऊपर की दो मंजिलें गिरा दी गई थीं, लेकिन पूरा ढांचा नहीं हटाया गया।इसके बाद वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी, हालांकि 30 अक्टूबर 2025 को जिला अदालत ने भी निगम आयुक्त के फैसले को सही ठहराते हुए पूरी मस्जिद को अवैध करार दिया। कोर्ट आदेश के बावजूद मस्जिद में नमाज जारी रहने से स्थानीय लोगों में नाराज़गी बढ़ गई है। इलाके की कई महिलाओं का कहना है कि पहले भी बाहरी राज्यों से आए कुछ लोग यहां का माहौल खराब कर चुके हैं और कॉलोनी के घरों में ताक-झांक करते थे, जिससे परिवार असुरक्षित महसूस करते थे। इसी वजह से अब लोग किसी भी तरह की चूक नहीं चाहते और प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं कि कोर्ट के स्पष्ट आदेश होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।

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