नई दिल्ली: आरक्षण नीति को और ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने एक अहम सिफारिश की है। आयोग ने कहा है कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा (CSE) के फाइनल रिजल्ट में उपजाति (सब-कास्ट) की जानकारी भी शामिल की जानी चाहिए। इससे यह समझने में आसानी होगी कि आरक्षण का लाभ समाज के किन-किन वर्गों तक वास्तव में पहुंच रहा है।
RTI अपील से उठा सवाल, पुराने रिकॉर्ड पर DoPT का जवाब
यह मामला सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत दाखिल एक दूसरी अपील की सुनवाई के दौरान सामने आया। अपीलकर्ता ने 1995 की UPSC परीक्षा के जरिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित उम्मीदवारों की जातिवार जानकारी मांगी थी। इस पर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने आयोग को बताया कि उनके पास उपजाति के स्तर पर कोई अलग से डेटा मौजूद नहीं है। विभाग केवल व्यापक श्रेणियों—अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)—के आधार पर ही जानकारी रखता है। इसके अलावा, विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि 1995 से जुड़े रिकॉर्ड अब उपलब्ध नहीं हैं या ट्रेस नहीं किए जा सकते।
CIC की सलाह: सब-कास्ट डेटा से समझ आएगा आरक्षण का असली लाभ
सुनवाई के दौरान DoPT ने यह भी बताया कि सिविल सेवा परीक्षा 2017 (CSE-2017) से लेकर अब तक के रिजल्ट में उम्मीदवारों की कैटेगरी की जानकारी उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। हालांकि, इन सूचनाओं में भी उपजाति का विवरण शामिल नहीं होता। इसी कमी को देखते हुए CIC ने कहा कि भले ही अभी ऐसा डेटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन भविष्य में इसे जोड़ा जा सकता है। आयोग का मानना है कि अगर उपजाति स्तर की जानकारी सामने आएगी, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरक्षण का लाभ बड़े वर्गों के भीतर किन समुदायों तक सीमित रह जाता है और किन तक नहीं पहुंच पाता। अपने आदेश में आयोग ने DoPT को सुझाव दिया कि वे फाइनल रिजल्ट में सामान्य श्रेणियों के साथ उपजाति की जानकारी जोड़ने पर विचार करें। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि आरक्षण नीति के प्रभाव का ज्यादा सटीक आकलन भी किया जा सकेगा। हालांकि, आयोग ने यह भी माना कि इस मामले में संबंधित विभाग की ओर से दी गई जानकारी में कोई कमी नहीं थी। इसलिए RTI अपील को निपटा दिया गया।
