ग्वालियर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की फोटो जलाने का मामला, SC/ST एक्ट और BNS की धाराओं में एडवोकेट गिरफ्तार

ग्वालियर: मध्य प्रदेश में 1 जनवरी 2026 को दिनदहाड़े डॉ. भीमराव आंबेडकर की फोटो जलाने की घटना सामने आने के बाद पूरे शहर में आक्रोश और तनाव का माहौल बन गया। यह घटना ग्वालियर के सिटी सेंटर, पटेल नगर तिराहा के पास एक व्यस्त सड़क पर हुई, जहां सार्वजनिक स्थान पर आंबेडकर की तस्वीर जलाते हुए युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आते ही दलित और आंबेडकरवादी संगठनों ने इसे संविधान, सामाजिक न्याय और दलित सम्मान पर सीधा हमला बताया।

सार्वजनिक सड़क पर खुलेआम तस्वीर जलाने का वीडियो, पुलिस की मौजूदगी पर उठे सवाल

वायरल वीडियो करीब 42 सेकंड का है, जिसमें एक युवक ज़ेब्रा क्रॉसिंग के बीच खड़ा होकर डॉ. भीमराव आंबेडकर की बड़ी छपी हुई तस्वीर को माचिस या लाइटर से आग लगाता हुआ दिखाई देता है। आसपास कई लोग खड़े नजर आते हैं, सड़क पर सामान्य ट्रैफिक चलता रहता है और कुछ दूरी पर पुलिस बैरिकेड व पुलिस जैसी वर्दी पहने लोग भी दिखते हैं, लेकिन वीडियो में तत्काल कोई रोक-टोक या हस्तक्षेप नहीं दिखाई देता। बताया जा रहा है कि यह घटना 1 जनवरी को दोपहर करीब 1 बजे से 2 बजे के बीच हुई। वीडियो सबसे पहले X पर साझा किया गया और कुछ ही घंटों में हजारों लोगों तक पहुंच गया, जिसके बाद पुलिस की भूमिका को लेकर सोशल मीडिया पर तीखे सवाल उठने लगे।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) और SC/ST एक्ट की गंभीर धाराएं लगाईं गईं

पुलिस ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की कई धाराएं लगाई हैं। इनमें धारा 223(b) जो गैरकानूनी जमाव से जुड़ी है, धारा 196(1)(a) और 196(1)(b) जो विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी और वैमनस्य फैलाने से संबंधित है, धारा 353(1)(c) और 353(2) जो लोक व्यवस्था भंग करने और उकसावे से जुड़े अपराधों पर लागू होती है, तथा धारा 190 जो सार्वजनिक शांति भंग करने से संबंधित है, शामिल हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (संशोधन 2015) की धारा 3(1)(u) और 3(1)(v) भी लगाई गई हैं, जो अनुसूचित जाति के सम्मान को ठेस पहुंचाने और सार्वजनिक स्थान पर अपमानजनक कृत्य से जुड़ी हैं।

शिकायत में लगाए गए आरोप और सोशल मीडिया पर फैलता आक्रोश

शिकायत में कहा गया है कि कुछ लोगों ने बिना अनुमति के सार्वजनिक सड़क पर एकत्र होकर डॉ. आंबेडकर की तस्वीर जलाई, उसे पैरों तले कुचला और आपत्तिजनक नारे लगाए। इसके बाद इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाया गया, जिससे समाज में आक्रोश, भय और जातीय तनाव की स्थिति पैदा हुई। शिकायत के अनुसार यह कृत्य केवल व्यक्तिगत हरकत नहीं, बल्कि समाज में वैमनस्य और असुरक्षा की भावना फैलाने की कोशिश है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे संविधान विरोधी कृत्य बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

आंबेडकर प्रतिमा विवाद की पृष्ठभूमि और संगठनों की चेतावनी

ग्वालियर में यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब पहले से ही डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा को लेकर विवाद चल रहा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट परिसर में आंबेडकर की प्रतिमा लगाने को लेकर पिछले कई महीनों से तनाव की स्थिति बनी हुई है। अक्टूबर 2025 में इस विवाद से जुड़े कुछ बयानों और वीडियो के बाद शहर में विरोध-प्रदर्शन हुए थे, स्कूल बंद हुए थे और माहौल तनावपूर्ण हो गया था। 26 दिसंबर 2025 को आकाशवाणी चौराहे पर आंबेडकर की प्रतिमा जलाने की कोशिश भी की गई थी, जिसे पुलिस ने समय रहते रोक दिया था। ताज़ा घटना के बाद भीम आर्मी और अन्य आंबेडकरवादी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। संगठनों का कहना है कि डॉ. आंबेडकर का अपमान सिर्फ एक समुदाय का नहीं, बल्कि पूरे संविधान और लोकतंत्र का अपमान है।

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