मथुरा: उत्तर प्रदेश के कोसीकलां क्षेत्र में ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध साधु चंद्रशेखर सिंह (45) की ट्रक से कुचलकर मौत के बाद पूरे इलाके में भारी तनाव फैल गया। घटना के बाद गुस्साई भीड़ ने दिल्ली-मथुरा हाईवे को जाम कर दिया, पुलिस पर पथराव किया और कई पुलिस गाड़ियों में तोड़फोड़ की। इस घटना को लेकर दो अलग-अलग कहानियां सामने आई हैं, जिससे मामला और ज्यादा उलझ गया है।
क्या हुआ था उस सुबह, कैसे हुई बाबा की मौत
बताया जा रहा है कि शनिवार तड़के करीब 4 बजे बाबा को सूचना मिली थी कि नेशनल हाईवे पर एक ट्रक में गोवंश को अवैध रूप से ले जाया जा रहा है। इसके बाद बाबा अपने दो साथियों के साथ बाइक से मौके के लिए निकल पड़े। जब वे कोसी इलाके के बठन गेट के पास पहुंचे तो उन्हें एक संदिग्ध ट्रक दिखाई दिया। बाबा और उनके साथियों ने उस ट्रक का पीछा करना शुरू कर दिया। करीब 7 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद उन्होंने कोटवन चौकी क्षेत्र के नवीपुर गांव के पास ट्रक को ओवरटेक कर लिया। बाबा बाइक से उतरे और ट्रक के सामने खड़े हो गए ताकि उसे रोका जा सके। इसी दौरान अचानक ट्रक की रफ्तार बढ़ गई। बताया जाता है कि बाबा ने अपने दोनों साथियों को धक्का देकर किनारे कर दिया, लेकिन खुद ट्रक की चपेट में आ गए। मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई।
पुलिस की अलग कहानी, हादसा बताया
घटना के करीब 2 घंटे बाद पुलिस और प्रशासन की ओर से बयान जारी किया गया, जिसमें पूरी कहानी अलग बताई गई। पुलिस के अनुसार, बाबा एक नगालैंड नंबर के कंटेनर को रोककर उसकी जांच कर रहे थे, जिसमें साबुन, फिनाइल और शैंपू जैसे सामान भरे हुए थे। इसी दौरान घना कोहरा था और विजिबिलिटी बहुत कम थी। पीछे से आ रहे राजस्थान नंबर के एक ट्रक ने कंटेनर को जोरदार टक्कर मार दी। इस टक्कर की चपेट में बाबा आ गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने साफ कहा कि दोनों ट्रकों में कहीं भी गोवंश नहीं मिला है और अफवाहों के कारण ही लोगों में गुस्सा फैला। इस हादसे में राजस्थान नंबर के ट्रक का चालक भी गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। इस तरह इस पूरी घटना में दो लोगों की जान गई। जैसे ही बाबा की मौत की खबर आसपास के गांवों और इलाकों में फैली, हजारों लोग मौके पर पहुंच गए। गुस्साए लोगों ने बाबा का शव सड़क पर रखकर दिल्ली-कोलकाता नेशनल हाईवे को जाम कर दिया। करीब 5 से 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। भीड़ आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और एनकाउंटर की मांग कर रही थी।
पुलिस और भीड़ में झड़प, पथराव और हिंसा
जब पुलिस मौके पर पहुंची और जाम खुलवाने तथा शव को कब्जे में लेने की कोशिश की, तो लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई और पुलिस पर पथराव करने लगी। इस पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए और उनके सिर फट गए। भीड़ ने पुलिस की 5 से 6 गाड़ियों में तोड़फोड़ की और उनके शीशे तोड़ दिए। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। कुछ जगहों पर फायरिंग की आवाजें भी सुनाई दीं।
शव को नहीं सौंपा, गोशाला ले जाकर रखी 6 मांगें
बवाल के बीच लोगों ने बाबा का शव पुलिस को देने से इनकार कर दिया और उसे बरसाना के आजनौंख गांव स्थित गोशाला में ले गए। वहां अंतिम दर्शन के लिए शव रखा गया और प्रशासन के सामने 6 मांगें रखीं। लोगों ने मांग की कि बाबा को शहीद का दर्जा दिया जाए, उनके नाम से स्मारक बनाया जाए, इलाके में पुलिस चौकी स्थापित की जाए, बाबा के कुछ खास लोगों को लाइसेंसी हथियार दिए जाएं, गोशाला को सरकारी संरक्षण में लिया जाए और बवाल में पकड़े गए लोगों पर कोई कार्रवाई न हो। लोगों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। स्थिति को संभालने के लिए जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। डीएम और पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाया और उनकी कुछ मांगों पर सहमति जताई। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि बाबा के दाह संस्कार स्थल पर समाधि बनाई जाएगी और गोशाला को सहायता दी जाएगी। इसके बाद लोगों ने जाम खत्म किया और गोशाला में ही बाबा का अंतिम संस्कार किया गया। उनके एक शिष्य ने उन्हें मुखाग्नि दी।
राजनीतिक बयानबाजी तेज, कई लोग गिरफ्तार
इस घटना के बाद राजनीति भी गरमा गई। Akhilesh Yadav ने कहा कि अगर यह हत्या है तो मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए और सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। वहीं संत समाज के लोगों ने भी निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। दूसरी तरफ पुलिस ने बवाल और पथराव के आरोप में 16 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें कुछ संगठन के कार्यकर्ता भी शामिल हैं। अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि अब हालात काबू में हैं और हाईवे से जाम हटा दिया गया है। पूरे मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। हालांकि, बाबा के समर्थक अभी भी इसे साजिश और हत्या मान रहे हैं, जबकि पुलिस इसे हादसा बता रही है। सच क्या है, यह जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा।
