नई दिल्ली: देशभर में जनरल कैटेगरी छात्रों और शिक्षाविदों के विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट ने UGC Regulations 2026 पर अंतरिम रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने इन नियमों को “पूरी तरह अस्पष्ट (completely vague)” बताते हुए कहा कि इनके गलत इस्तेमाल की गंभीर संभावना है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) को नोटिस जारी कर नियमों की दोबारा समीक्षा का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने समाज में बढ़ती जातिगत सोच पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा— “75 साल की आज़ादी के बाद भी अगर हम जाति से ऊपर नहीं उठ पाए, तो क्या हम एक पिछड़े समाज की ओर बढ़ रहे हैं?”
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियां: ‘अलग-अलग हॉस्टल और व्यवस्था खतरनाक’
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि देश आज भी जातिगत भेदभाव से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया है। उन्होंने कैंपस जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि रैगिंग के दौरान उत्तर-पूर्व या दक्षिण भारत से आए छात्रों की संस्कृति, खान-पान और पहनावे पर टिप्पणियां की जाती हैं, जिससे टकराव बढ़ता है। सीजेआई ने साफ कहा: “अलग-अलग हॉस्टल जैसी बातें तो हालात और बिगाड़ सकती हैं। भगवान के लिए, इंटर-कास्ट शादियां भी होती हैं। हम भी हॉस्टल में रहे हैं, जहां सब साथ रहते थे।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि-“मैं उम्मीद करता हूं कि भारत अमेरिका जैसी अलगाव वाली शिक्षा व्यवस्था की ओर न जाए, जहां कभी अश्वेत और श्वेत छात्रों के लिए अलग स्कूल होते थे। ऐसी स्थिति का दुरुपयोग किया जा सकता है।”
UGC Regulations 2026 में क्या था और विवाद क्यों बढ़ा?
UGC के 2026 के नए नियमों के तहत सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में Equal Opportunity Centre (EOC) बनाना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही कैंपस स्तर पर इक्विटी कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया, जिनका काम SC, ST और OBC छात्रों से जुड़ी जातिगत भेदभाव की शिकायतों की जांच करना है। हालांकि, इन नियमों को लेकर जनरल कैटेगरी के छात्रों और कई शिक्षाविदों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि इन नियमों में जनरल कैटेगरी के लिए शिकायत दर्ज कराने की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं दी गई, जिससे पूरी शिकायत प्रणाली एकतरफा हो जाती है। विरोध करने वालों का यह भी तर्क है कि ऐसे प्रावधानों से नई तरह की असमानता और सामाजिक विभाजन पैदा होने का खतरा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस आपत्ति को गंभीर मानते हुए कहा कि नियमों की भाषा स्पष्ट नहीं है और इन्हें लागू करने से पहले विशेषज्ञों द्वारा दोबारा समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है।
Article 14 पर सवाल, नियम फिलहाल स्थगित; 2012 के नियम लागू
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि UGC नियमों की धारा 3(c) में “जातिगत भेदभाव” की परिभाषा को केवल SC, ST और OBC तक सीमित कर दिया गया है, जिससे जनरल कैटेगरी पूरी तरह बाहर हो जाती है। उन्होंने तर्क दिया कि भेदभाव किसी एक ही वर्ग के खिलाफ नहीं हो सकता और इस तरह की परिभाषा संविधान के Article 14 (समानता का अधिकार) का स्पष्ट उल्लंघन करती है। इस पर कोर्ट ने माना कि भले ही Article 15(4) के तहत SC-ST वर्गों के संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं, लेकिन प्रगतिशील कानूनों में किसी भी तरह का प्रतिगमन (regression) नहीं होना चाहिए। कोर्ट की अंतरिम रोक के बाद UGC Regulations 2026 फिलहाल लागू नहीं होंगे और देशभर के सभी कॉलेज व विश्वविद्यालय अब UGC के 2012 के पुराने नियमों के अनुसार ही काम करेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।
