बिहार चुनावों की झलक मिलने लगी है आपको बता दें कि राज्य के विधानसभा का सत्र नवंबर 2020 में ख़त्म हो रहा है।
जैसा कि बिहार की राजनीति पर जाति हावी होती है लेकिन पार्टियां इसी राजनीति पर हावी हो जाती है। राज्य की 50 से भी आबादी दलित पिछड़ों वर्गों की है यहां कि राजनीति में लालू नितीश विचाधारा का फ़िलहाल दबदबा है।

हाल ही में हिंदुस्तान अख़बार में छपी खबर के अनुसार बिहार BJP नेता व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी नें दलितों के आरक्षण पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि “आरक्षण को कोई छू भी नहीं सकता, जब तक भेदभाव रहेगा तब तक आरक्षण जारी रहेगा।”
यही नहीं दलित समाज को आरक्षण के अलावा प्रोमोशन में भी आरक्षण देने की बात कही जबकि उनके आरक्षण में किसी भी तरह का संशोधन यानी OBC की तरह क्रीमीलेयर के प्रावधान को पार्टी के मूड से साफ़ इंकार कर दिया।

उप मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा कि “भाजपा एससी एसटी के लिए पदोन्नति में आरक्षण के पक्षधर है लेकिन SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर के विरोध में हैं” ।
इसके बाद उन्होंने SC-ST एक्ट को सख़्त किए जाने को मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी बताते हुए कहा कि “एससी एसटी अत्याचार अधिनियम में मोदी सरकार ने 23 नई धाराएं जोड़ी हैं सुप्रीम कोर्ट ने जिन धाराओं को शिथिल किया था संसद में बिल पारित कर उसे बहाल किया।”

दलित संगठनों द्वारा उठाए गए रविदास मंदिर पर उन्होंने कहा कि “दिल्ली में तोड़े गए रविदास मंदिर की लड़ाई में केंद्र सुप्रीम कोर्ट से लड़ी और मंदिर निर्माण के लिए 400 मीटर जमीन तुगलकाबाद में उपलब्ध कराया है।”
लालू-राबड़ी की सरकार पर उपमुख्यमंत्री ने कहा “गरीबों के नाम पर आंसू बहाने वाले राजद कांग्रेस के 15 वर्षों के राज में 2005 में एससी एसटी का बजट 40 करोड़ था जो अब 1600 करोड़ हो गया है।

आगे उन्होंने कहा कि “एससी एसटी के सभी 65 आवासीय विद्यालयों को प्लस टू में उत्क्रमित करने का सरकार ने निर्णय लिया है। एनडीए सरकार दलित युवकों को टोला सेवक विकास मित्र बना कर भविष्य मना रही है।”