470 करोड़ के रेलवे प्रोजेक्ट का ठेका चीन की बजाय भारतीय कंपनी को, खिसियाई कंपनी पहुंची कोर्ट !

नई दिल्ली: 470 करोड़ के चीनी कम्पनी के ठेके को रद्द कर भारतीय कम्पनी को मिलेगा काम करने का मौका।

भारत व चीन के बीच उपजे सीमा विवाद के बाद भारत नें कई चीनी कम्पनियों के ठेके रद्द कर दिए थे। वहीं हाल ही में भारतीय रेलवे ने सिग्नलिंग और दूरसंचार कार्य पर खराब प्रगति के लिए चीनी कंपनी के 470 करोड़ रुपये के अनुबंध को समाप्त कर दिया था। अब इसके कुछ दिनों बाद, एक भारतीय कंपनी नें रेलवे के अधूरा काम पूरा करने की इच्छा जताई है। हाल ही में, केके बिड़ला समूह ने ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) पर अधूरे सिग्नलिंग और टेलीकम्यूनिकेशन के काम को पूरा करने में दिलचस्पी दिखाई है।

KK बिड़ला समूह द्वारा प्रबंधित भारत की सबसे पुरानी रेलवे इंजीनियरिंग कंपनियों में से एक, टेक्समको रेल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड ने DFC प्रोजेक्ट की क्रियान्वित करने वाली कंपनी, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DFCCIL) को अधूरे काम को पूरा करने का प्रस्ताव लिखा है।

टेक्समाको रेल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड की एक शाखा, कालिंदी रेल निर्माण ने तकनीकी रूप से अनुमोदन प्राप्त किया था। और वर्ष 2016 के निविदा में दूसरी सबसे अधिक बोली लगाने वाली कंपनी थी।

कंपनी के प्रस्ताव में कहा गया है कि वह परियोजना के समग्र हित में और राष्ट्रीय हित में (अनुबंध) पैकेज लेने की संभावना का पता लगा रही है। एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार शेष वित्तीय कार्य इस बात पर निर्भर करेगा कि पहले से स्थापित चीनी कंपनी का सिग्नलिंग सिस्टम अन्य प्रणालियों के साथ कितना अनुकूल है। कंपनी के कार्यकारी ने आगे कहा कि हिताची के साथ साझेदारी में टेक्समाको पहले से ही पश्चिमी डीएफसी में रेवाड़ी से वड़ोदरा तक सबसे बड़ा सिग्नलिंग कार्य कर रहा है।

डीएफसीसीआईएल के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, आमतौर पर मानसून के दौरान कोई काम नहीं होता है। अधिकारी ने कहा कि डीएफसीसीआईएल इस समय का उपयोग औपचारिकताओं को खत्म करने के लिए करना चाहता है ताकि बरसात का मौसम खत्म होते ही काम शुरू हो सके। रिपोर्ट में कहा कि निविदा के शेष कार्य को राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा और नई कंपनी का चयन करने के लिए फिर से बोली प्रक्रिया होगी। 470 करोड़ रुपये के अनुबंध को खोने के बाद, चीनी कंपनी ने अनुबंध समाप्ति पर DFCCIL के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।


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