16% आरक्षण के खिलाफ़ कोर्ट में पहुंची याचिका :
बीते हफ़्ते महाराष्ट्र की विधानसभा में राज्य सरकार नें महाराष्ट्र की आबादी के 30% वाले भाग जिसमें मराठा समुदाय आता है उसे 16% आरक्षण की सुविधा राज्य की सरकारी नौकरियों व शिक्षण संस्थाओं में दिया था | यह बिल विधानसभा में 29 दिसंबर को सूबे के मुखिया द्वारा सदन के पटल में रखा गया और यह बिल बिना बहस व सवाल के सर्वसम्मति से पास हो गया |
इस नए आरक्षण के प्रावधानों को बाम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई इसलिए फ़िलहाल कोर्ट द्वारा इस पर रोंक लगाई गई थी | मराठा समाज को आरक्षण देने के खिलाफ़ एक याचिकाकर्ता नें सरकार को चुनौती देने के लिए कोर्ट का रूख किया था | उसी याचिका की सुनवाई बाम्बे हाईकोर्ट में इसी महीनें 10 दिसंबर को होगी |

50% से ज्यादा आरक्षण बिना आकड़ों के नहीं हो सकता : कोर्ट
एक बात यह जानने वाली है कि एससी-एसटी समुदाय के लोगों के लिए देश के संविधान में ही आरक्षण की सुविधा दी गई थी इसलिए उन्हें 22% आरक्षण मिला | उसके बाद ओबीसी आरक्षण के लिए देश में कई आंदोलन हुए, वीपी मंडल वाली सरकार नें 90 के दशक में 27% आरक्षण ओबीसी समुदाय को दे दिया |
उसके बाद भारत सरकार बनाम इंदिरा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट नें साफ साफ़ कहा कि ” अगर आरक्षण की सीमा किसी भी राज्य में 50% से ज्यादा होता है उसे ख़ारिज कर दिया जाएगा ” |
लेकिन 2010 के एक फैंसले में कोर्ट नें फिर एक आदेश दिया कि ” सरकार चाहे तो 50% की सीमा बढ़ा सकती हैं लेकिन उसके लिए सरकार को वैज्ञानिक आंकड़े देने होंगे ” |
इसी बात को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता नें इस मराठा आरक्षण को कोर्ट में चुनौती दिया है |