गुजरात में भी आ सकता है जनसंख्या नियंत्रण बिल, उपमुख्यमंत्री बोले- अधिकारी मसौदे का कर रहे हैं अध्ययन

गांधीनगर: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा पेश किए जा रहे जनसंख्या नियंत्रण विधेयक के बीच गुजरात सरकार के अधिकारी भी मसौदे का अध्ययन कर रहे हैं ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इस पर विचार किया जा सके। 

मीडिया में दिए एक बयान में गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने जनसंख्या नियंत्रण विधेयक के संबंध में कहा कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर वह इस संबंध में एक विधेयक लाने पर भी विचार करेंगे।

उपमुख्यमंत्री ने कहा यह भी कहा कि गुजरात सरकार के शीर्ष अधिकारी वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मसौदे का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने अपने जवाब में कहा “विधेयक के पहलुओं की जानकारी ली जा रही है। सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और सरकार को विधेयक के बारे में जानकारी दी जाएगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार इस संबंध में राजनीति में चुनाव के लिए पहले ही निर्णय ले चुकी है और जनसंख्या नियंत्रण के संबंध में स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय के साथ विभिन्न निर्णय लिए गए हैं। हालांकि भविष्य में अगर जरूरत पड़ी तो सरकार इस संबंध में एक विधेयक लाने पर भी विचार करेगी।

UP के बाद कई राज्यों में उठी मांग:

गौरतलब है कि जनसंख्या नियंत्रण नीति पर उत्तर प्रदेश विधि आयोग ने एक मसौदा तैयार किया है जिसे लेकर उत्तर प्रदेश सरकार एक विधेयक लाएगी। उत्तर प्रदेश में इस कदम के बाद देश के कई राज्यों खासकर एनडीए शासित राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की मांग उठने लगी है।

CM योगी ने जनसंख्या नीति का किया है विमोचन

बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर ‘उत्तर प्रदेश जनसंख्या नीति 2021-2030’ का विमोचन किया है।   

इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि ‘उत्तर प्रदेश जनसंख्या नीति 2021-30’ का संबंध प्रत्येक नागरिक के जीवन में खुशहाली व समृद्धि लाने से है। गरीबी व जनसंख्या वृद्धि में संबंध होता है। उन्होंने कहा, दो बच्चों के बीच में अंतराल नहीं होने से उनके पोषण पर नकारात्मक असर तो पड़ेगा ही, साथ में शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर को नियंत्रित करने में अत्यंत कठिनाई होगी।

जनसांख्यिकी और संतुलन न बिगड़े

उन्होंने कहा था कि जनसंख्या स्थिरीकरण की दिशा में प्रयास करने के साथ ही हमें इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि देश की जनसांख्यिकी और संतुलन पर इसका कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।

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