इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर की हां में हां मिलाये तो प्रधानमंत्री मोदी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा इस कमेटी के अध्यक्ष थे दरअसल कमेटी का गठन ही इनकी अध्यक्षता में हुआ था। कमेटी की मीटिंग ‘कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑन अफर्मेटिव एक्शन फॉर एससी/एसटी इन द प्राइवेट सेक्टर’ के नाम से संपन्न हुई है जिसमे CII, FICCI उद्योग समूह भी शामिल हुए थे।

वही इस मीटिंग की खबर जैसे ही सवर्णो के कानो में गूंजेगी तो भाजपा के प्रति इस कोर वोट बैंक की भौंहे सिकुड़ना लाज़िमी है, वैसे भी आज कल सोशल मीडिया पलटफोर्म पर सवर्ण नोटा दबाने के नाम से ही लार टपकाने लगते है।
आपको हम बताते चले की इस कमेटी का गठन मनमोहन सिंह सरकार की यूपीए 1 में वर्ष 2006 को हुआ था जिसकी मई 2014 तक कुल सिर्फ 7 मीटिंग ही हो सकी थी।
2019 का चुनाव पिछडो के वोटो से जीतने का मन बनाने वाली भाजपा पिछडो को खुश करने के चक्कर में कही सवर्णो का दिल ना तोड़ डाले क्यूंकि निजी क्षेत्र में आरक्षण के प्रति सवर्णो की जीरो टॉलरेंस पालिसी देखने को मिलती आयी है।

अमेरिका जैसे देशो ने सभी समुदायों को समाज में हिस्सा दिलाने के अफर्मॅटिव एक्शन की शुरुआत थी जिसमे सभी को बराबर का हिस्सा देने का प्रावधान था परन्तु भारत के आरक्षण में सीधे कोटे का प्रावधान अमेरिका के अफर्मॅटिव एक्शन में दूर दूर तक ताकने पर भी नहीं दिखता है।
इसी तरह का हिसाब किताब ब्रिटेन में भी है जिसे पॉजिटिव एक्शन के नाम से बुलाया जाता है परन्तु भारत के कोटे जैसी व्यवस्था आपको वहाँ भी नहीं मिलेगी।