श्रीलंका में ‘गौ हत्या’ पर बैन लगाने के लिए संसदीय दल ने दी मंजूरी

कोलंबो (श्रीलंका): अब गोवध पर रोक लगाने के लिए संसद ने बड़ा फैसला लिया है।

श्रीलंका में सत्तारूढ़ पार्टी केे संसदीय दल, श्रीलंका पोदुजाना पेरमुना (SLPP) ने आज श्रीलंका में गौ वध पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

ये रिपोर्ट श्रीलंका की ऑनलाइन न्यूज एजेंसी कोलंबो गजट द्वारा प्रकाशित की गई है। जिसमें बताया गया है कि कैबिनेट प्रवक्ता केहलिया रामबुकवेला ने कहा कि एसएलपीपी संसदीय समूह की बैठक में प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने कहा था कि उन्हें पशु वध पर प्रतिबंध लगाने की उम्मीद है।

मंत्री ने आगे कहा कि बैठक में भाग लेने वाले सभी एसएलपीपी सांसदों ने प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री की सराहना भी की है। मंत्री ने ये भी कहा कि “प्रधानमंत्री द्वारा कोई आधिकारिक प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया गया था, लेकिन वह जल्द ही इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की उम्मीद करते हैं।”

मंत्री रामबुक्वेला ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री यह फैसला करेंगे कि कब और कैसे औपचारिक रूप से कैबिनेट को गोवध पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव प्रस्तुत करना चाहिए। यदि प्रस्ताव को कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया जाता है और लागू किया जाता है तो सरकार मांस का आयात करेगी।

हालांकि इस खबर पर कोलंबो स्थित एक पत्रकार सुनन्दा देशप्रिया ने भी मुहर लगाई है। पत्रकार ने बताया कि श्री लंका केे प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे ने कहा है कि गोमांस के लिए गोवध को प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव को उनके संसदीय समूह ने मंजूरी दे दी है। यह अल्ट-सिंहला समूहों द्वारा मुस्लिम विरोधी अभियानों की जीत है। मांस के लिए चिकन, बकरियों आदि को मारने की अनुमति होगी !

अगस्त के शुरुआती दिनों में श्रीलंका में संसदीय चुनाव हुए थे। पीएम नरेंद्र मोदी पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने अंतिम जीत होने से पहले ही, महिंद्रा राजपक्षे को कॉल करके बधाई दे दी थी। मोदी ने ट्वीट किया था, “द्विपक्षीय सहयोग के सभी क्षेत्रों में और आगे बढ़ने के लिए, हम साथ मिलकर काम करेंगे और अपने विशेष रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।”


Donate to Falana DIkhana: यह न्यूज़ पोर्टल दिल्ली विश्विद्यालय के मीडिया छात्र अपनी ‘पॉकेट मनी’ से चला रहे है। जहां बड़े बड़े विश्विद्यालयों के छात्र वामपंथी विचारधारा के समर्थक बनते जा रहे है तो वही हमारा पोर्टल ‘राष्ट्रवाद’ को सशक्त करता है। वही दिल्ली विश्विद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ रहे हमारे युवा एडिटर्स देश में घट रही असामाजिक ताकतों के खिलाफ लेख लिखने से पीछे नहीं हटते बस हमें आशा है तो आपके छोटे से सहयोग की। यदि आप भी हम छात्रों को मजबूती देना चाहते है तो कम से कम 1 रूपए का सहयोग अवश्य करे। सादर धन्यवाद, ‘जयतु भारतम’

                                                        

Leave a Reply

Previous Story

‘चीन उईगर मुस्लिमों से बंधुआ मजदूरी कराता है उन्हें नजरबंद करता है’- श्रम दिवस पर अमेरिकी विदेश विभाग

Next Story

ग्राम सचिव दलित प्रधान को वोट न देने पर आवास योजना का लाभ न देने की देता है धमकी, जातिवादी सचिव से ग्रामीण परेशान

Latest from Falana Report