अलविदा कादर खान : न भारत में जन्म न मृत्यु, 81 बरस की रही ज़िन्दगी

ओटावा (कनाडा) : मशहूर हास्य कलाकार कादर खान नें सात समंदर दूर कनाडा में इस दुनिया को अलविदा कह दिया | इसकी पुष्टि उनके बेटे सरफराज खान नें की है |

अविभाजित ब्रिटिश में बलूचिस्तान में हुआ था जनम : 

महीना अक्टूबर का तारीख 22, और साल 1937 जब जनम हुआ एक ऐसे कामेडियन का जिसने अपने बेहतरीन अभिनय से दर्शकों को खूब लोटपोट कराया | दरअसल उनका जनम तो ब्रिटिश राज में अविभाजित बलूचिस्तान में हुआ था लेकिन यह जगह आज पकिस्तान की हो चुकी है | हालांकि बाद में उनका परिवार हिंदुस्तान में आकर रहने लगा |

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने इस्माइल युसुफ़ कालेज से ग्रेजुएशन किया | उन्हीं दिनों जब वो कालेज में एक कार्यक्रम में कामेडी कर रहे थे तो उस दौर के मशहूर फिल अभिनेता दिलीप कुमार की नजर उनके अभिनय पर पड़ी | और कुमार साहब कादर खान की एक्टिंग से खूब प्रभावित हुए इसी कारण उन्होंने साथ में 2 फिल्में भी की |

300 से अधिक फिल्में, “बाप नम्बरी बेटा दस नम्बरी” के लिए पुरस्कार :

81 साल की उमर में खान साहब नें हिंदुस्तानियों को जी भर के हंसाया, देखने वाले पेट पकड़कर भी हंसे | उनकी फ़िल्मी पारी 1973 में शुरू हुई थी और वो फिल्म थी ” दाग़ ” जिसमें उन्होंने एक वकील की भूमिका निभाई थी |

करीब 300 से ज्यादा फिल्मों में उन्होंने एक्टिंग की और खूब नाम कमाया | उनकी एक फिल्म ” बाप नम्बरी बेटा दस नम्बरी ” तो दर्शकों को खूब भाई | जिसके लिए उन्हें पुरस्कार भी मिला |

साल 2015 था जब वो फ़िल्मी पर्दे पर आख़िरी पर दर्शकों को फ़िल्म ” हो गया दिमाग का दही ” में नजर आए थे |

कनाडा में ली अंतिम सांस, वजह भी सांस बनी :

कई दिनों से खान साहब अस्पताल में अपनी सांसे गिन रहे थे लेकिन 1 जनवरी 2019 को वो जिंदगी से जंग हार गए और सांस लेने में दिक्कत बनी उनकी मौत की वजह |

कुछ दिन पहले कनाडा के एक अस्पताल में उन्हें BiPAP वेंटीलेटर में रखा गया था, जहां उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता ही गया |

आपको बता दें कि खान साहब नें कनाडा की नागरिकता स्वीकार ली थी |

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