दरअसल मालपेट से विधायक अहमद बालला के खिलाफ भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चे की सेक्रेटरी बांगरू श्रुति ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि विधायक ने उनके खिलाफ अपमानजनक शब्दों का उपयोग करते हुए उन्हें निचा दिखाने का प्रयास किया है।
श्रुति के अनुसार 7 मई को कमाल नगर में एक दलित बच्ची के साथ हुए यौन शोषण पर वह उनसे मिलने उनके घर पहुंची थी तभी वहां AIMIM वाले भी आ धमके।
विधायक ने श्रुति व अन्य बीजेपी नेताओ को वहां उनसे पहले पहुंचे देखा तो भड़क गए।
श्रुति के अनुसार AIMIM नेता ने उन्हें ‘दोयम दर्जे का व चोर बताया’ व उन्हें अपमानित करने का हर एक प्रयास किया। मामले को चन्देर घाट थाने में दर्ज कराया गया जहां पुलिस ने श्रुति की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए AIMIM नेता पर एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया।
लेकिन पुलिस के ढीले रवैय्ये व गिरफ्तारी न होने पर बीजेपी नेताओ ने नाराजगी जताते हुए हैदराबाद पुलिस से मुलाकात कर जल्द गिरफ़्तारी की मांग करी। वहीं पुलिस के अनुसार उन्होंने कई धाराओं में विधायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है व जाँच के बाद उचित कार्यवाई करेंगे। परन्तु अगर किसी आम आदमी की बात की जाये तो यही एक्ट उन पर बिना जाँच के थोप दिया जाता है।
इसी जाँच सम्बंधित सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दलित संगठनों ने जो हिंसा देश में भड़काई थी वो देश के सामने है तो आज AIMIM विधायक की जाँच के बाद गिरफ़्तारी क्यों पहले क्यों नहीं?
आपको बता दे कि श्रुति बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बांगरू लक्मण की बेटी है जो कि अनुसूचित जाति(चमार) से सम्बन्ध रखती है।
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