13 साल अमेरिका नें भारत की ख़ाक छानी, अटल जी नें ये करके पानी फेर दिया

नईदिल्ली : भारत रत्न श्री अटल बिहारी को 25 दिसंबर के दिन सुशासन दिवस के रूप में समूचा देश याद करता है | चम्बल के बीहड़ों के बीच बसे ग्वालियर की माटी में आज के ही दिन 1924 में पिता कृष्णबिहारी व माता कृष्णा देवी के घर अटल नामक बालक का जनम हुआ | उनके जन्मदिन पर हम उनके कुछ उल्लेखनीय कामों पर निगाह डालेंगे |

भारत आण्विक शक्ति न है, न बनना चाहता : यूएन में अटल बिहारी 

भारतीय राजनीति का ध्रुव कहे जाने वाले अटल बिहारी आजीवन आजातशत्रु रहे यानी जिनका कोई दुश्मन न हुआ | हो भी क्यों न ? क्योंकि पूरा विपक्ष मुंह में हाँथ रखकर इंतजार करता था कि कब अटल जी का भाषण शुरू होगा ? यूएन में ऐसा ही एक भाषण जिसकी वजह से भारत पूरी दुनिया के सामने अपने आप को मजबूती से रख सका |


1977 में तत्कालीन पीएम मोरार जी देसाई सरकार में बतौर विदेश मंत्री अटल जी को यूएन के 35वें अधिवेशन में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा गया था | वहां उन्होंने अपना भाषण मातृभाषा हिंदी में दिया जोकि इतिहास में पहली बार ही हुआ था | उनके इस ओजस्वी भाषण को विश्व के बड़े नेताओं सहित पूरे सदन के लोगों नें खड़े होकर सराहा और ताली बजाकर अभिवादन किया था |

भाषण में उन्होंने भारत की हजारों साल पुरानी वसुधैव कुटुम्बकम वाली संस्कृति को जोड़ते हुए कहा था कि ” अध्यक्ष महोदय ! भारत सभी देशों से मैत्री करना चाहता है, और किसी पर अपना प्रभुत्व नहीं जमाना चाहता है | भारत न तो आण्विक शक्ति है और न ही बनना चाहता है ” |

1998 में पोखरण परीक्षण से अमेरिका हुआ था शर्मिंदा :

अटल जी के बतौर पीएम अगर उनकी सबसे बड़ी उप्लब्धि गिने तो 11-13 मई, 1998 में भारत द्वारा गुप्त तरीके से पोखरण परमाणु परीक्षण का नाम सबसे ऊपर आता है | क्योंकि इस परीक्षण के बाद विश्व की बड़ी शक्तियां जैसे अमेरिका चीन, जापान, फ़्रांस भारत को आँख दिखा रहे थे | भारत नें इस परीक्षण को बेहद गुप्त तरीके से पूरा किया था जिसकी भनक बेहद शातिर अमेरिकी खुफ़िया एजेंसी सीआईए को भी नहीं लगी |


लिहाजा बौखलाए अमेरिका सहित, जापान, चीन जैसे कई देशों नें भारत पर आर्थिक प्रतिबंध मढ़े | फिर भी भारत अटल जी के नेतृत्व में अडिग रहा, और अटल जी के इस काम से अमेरिकी एजेंसी सीआईए को काफ़ी शर्मिंदा होना पड़ा था |

क्योंकि 1985 के बाद से ही ये एजेंसी भारत के सभी उपग्रह व अंतरिक्ष सम्बंधित कामों पर कड़ी नजर लगाई थी | लेकिन मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार व DRDO के निदेशक अब्दुल कलाम के साथ परीक्षण को अंजाम दिया गया | यह इतना गुप्त मिशन था जिसके बारे में मंत्रीमंडल के भी बड़े नेताओं को नहीं पता चला था |

ऐसे ही उनके न जाने कितनी उल्लेखनीय काम हैं जिनको हम याद करते हैं | अटल जी इसी साल 2018 में स्वतंत्रता दिवस के ठीक एक दिन बाद 16 अगस्त को दुनिया को अलविदा कह चुके हैं | लेकिन उनके आदर्श व व्यक्तित्वों की यादें कभी नहीं मिट सकती |

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