SC-ST एक्ट : अनिवार्य मृत्यु दंड को हाई कोर्ट में मिली चुनौती, केंद्र को भेजा नोटिस

चंडीगढ़ : हर जुबान पर बुकमार्क हुए एससी एसटी एक्ट अपने विवादित पहलुओं के बीच एक बार फिर से चर्चाओं में गोते मार रहा है। नेशनल स्कूल ऑफ़ लॉ बैंगलुरु में पढ़ने वाले छात्र दक्ष काद्यान ने एससी एसटी एक्ट में अनिवार्य मृत्यु दंड की सैंवधानिकता को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी है ।

जिसपर संज्ञान लेते हुए जस्टिस कृष्णा मुरारी ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है। याचिकाकर्ता दक्ष ने कोर्ट में एससी एसटी एक्ट के सेक्शन 3(2)(i) को चुनौती देते हुए कहा की यह आर्टिकल 14 व 21 का हनन करता है जिससे हमारे मौलिक अधिकारों को हमसे छीना जाता है।



आपको बता दे की सेक्शन 3(2)(i) में उस व्यक्ति को अनिवार्य मृत्यु देने का प्रावधान है जिसने जानबूझकर झूठे सबूत दिए और गढ़े जिसके परिणामस्वरूप अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदायों के एक निर्दोष सदस्य को दोषी ठहराया गया और उसे मार दिया गया।

याचिकाकर्ता दक्ष के अनुसार बिना किसा विशेष सबूतों और परिस्थिति को धयान में रखे कोर्ट को उस व्यक्ति को मृत्यु की सजा सुनानी होगी जो अपने आप में कोर्ट के अधिकारों की अवहेलना व मनमाना है।
साथ ही दक्ष ने यह तर्क रखा है की किसी को भी उसकी बात न रखने देना अपने आप में असैंवधानिक है।

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