कोर्ट ने छेड़छाड़ और एससी एसटी एक्ट के आरोपियों को किया बरी, पीड़ित पक्ष को मुआवजा राशि वापस करने के दिए निर्देश

सुल्तानपुर/अमेठी- उत्तरप्रदेश में एससी एसटी एक्ट और यौन अपराध के एक से अधिक मामलों में स्पेशल जज पाक्सो एक्ट पवन कुमार शर्मा की कोर्ट ने कथित चार आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया हैं। आपको बता दे कि एससी एसटी एक्ट सहित अन्य आरोपों के मामलों में आरोपियों को बरी करने के पीछे का मुख्य कारण पीड़ित पक्षों के द्वारा बयान को झूठा और तोड़ मरोड़कर पेश करने की बात सामने आ रहीं हैं।

जिसके बाद कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए झूठा बयान देने वालों के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 344 के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश जारी किया है, इतना ही नहीं कोर्ट ने पीड़ित पक्षों को पूर्व में एससी एसटी एक्ट के तहत मिली सहायता राशि को भी वापस करने का फैसला सुनाया हैं।

बता दे कि पहला मामला सुल्तानपुर के करौदीकला थाना क्षेत्र का है, जहां बीते दो साल पहले दिसंबर 2020 में एक दलित युवती की माँ ने रमसापुर निवासी नीरज सिंह और वीवीपुर तिवारी निवासी नीरज गौतम के खिलाफ गैंगरेप, एससी एसटी एक्ट व पाॅक्सो एक्ट सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया था। जहां कोर्ट में ट्रायल के दौरान दोनों मां-बेटी तोड़ मरोड़कर झूठा बयान दर्ज कराया और पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सकी, जिसके बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया और झूठा बयान देने के आरोप में पीड़ित पक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया हैं।

इतना ही नहीं कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट के तहत सरकार की तरफ से मिलने वाली मुआवजा राशि को भी 15 दिन के भीतर वापस जमा करने का आदेश दिया हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि कथित पीड़ित पक्ष के द्वारा तय समय के भीतर राशि जमा नहीं कराई जाती है तो वसूली की कार्रवाई भी की जाएगी।

वहीं दूसरा मामला अमेठी जिले के मुसाफिरखाना थाना क्षेत्र का है, जहां दादरा गांव निवासी राकेश तिवारी उर्फ पप्पू के खिलाफ मार्च 2018 में 14 वर्षीय नाबालिग के साथ छेड़छाड़, एससी एसटी एक्ट व अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में भी पीड़ित पक्ष के द्वारा तोड़ मरोड़कर झूठा बता बयान दर्ज कराया गया था, जिसके बाद कोर्ट ने इस मामले में भी कथित आरोपी राकेश तिवारी उर्फ पप्पू को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। आपको जानकर हैरानी होगी कि कोर्ट ने इस मामले में भी सही बयान न देने के आरोप में पीड़ित पक्ष के खिलाफ धारा 344 के तहत मुकदमा चलाने और मुआवजे राशि को वापस करने का फैसला सुनाया।

वहीं एक अन्य मामले की बात करें तो यह मामला भी अमेठी के गौरीगंज थाना क्षेत्र से ही सामने आया है, जहां अर्जुनपुर अन्नी बैजल गाँव निवासी शिवा के खिलाफ मई 2020 में 15 वर्षीय युवती को बहला फुसला कर भगा ले जाने सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में भी पीड़ित पक्ष कोर्ट में लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर सका और स्पेशल जज पवन कुमार शर्मा की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया।

+ posts

Kapil reports for Neo Politico Hindi.

Leave a Reply

Previous Story

गैंग रेप, SC-ST एक्ट और हत्या के मामले में ब्राह्मण युवक को झूठा फंसाया, 1 साल तक जेल, फिर ऑनर किलिंग का आया सच!

Next Story

नाबालिग ब्राह्मण लड़की से चार ने किया गैंग रेप, झाड़ियों में फेंका, वीडियो बनाकर किया वायरल

Latest from कुछ नया आया क्या

यूपी- ब्राम्हणों पर जातिगत टिप्पणी करने के मामले में थानेदार पर गिरी गाज, एसएसपी ने किया लाइन अटैच

बदायूं- पंडितों के खिलाफ जातिगत टिप्पणी का ऑडियो वायरल होने और ब्राह्मण समाज के लोगों द्वारा…

यूपी: ब्राह्मण युवती को पत्नी बनाने के लिए दलित व्यक्ति ने दिया झूठा आवेदन, हाईकोर्ट ने लगाया 50 हजार का जुर्माना

लखनऊ- इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले की सुनवाई करते हुए एक दलित व्यक्ति पर…