भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27% आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले “शिवम गौतम बनाम मध्य प्रदेश राज्य” में अपनी पैरवी करने के लिए DMK सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन को नियुक्त किया है। उन्हें हर पेशी पर 5.5 लाख रुपये और हर कॉन्फ्रेंस पर 1.5 लाख रुपये फीस दी जाएगी।
वायरल कंटेंट पर सरकार की सफाई
हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ सामग्री तेजी से वायरल हुई थी, जिसमें दावा किया गया कि यह सरकार के सुप्रीम कोर्ट में दायर शपथपत्र का हिस्सा है। इस पर मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग ने कहा है कि यह दावे पूरी तरह से झूठे, मनगढ़ंत और भ्रामक हैं। सरकार ने साफ किया है कि जिस वायरल कंटेंट को सरकारी रुख बताया जा रहा है, उसका असली शपथपत्र से कोई लेना-देना नहीं है और वह किसी भी सरकारी नीति या निर्णय को नहीं दर्शाता। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह विवादित सामग्री रामजी महाजन आयोग की 1983 की अंतिम रिपोर्ट (भाग–1) से ली गई है। यह आयोग 1980 में बना था और 22 दिसंबर 1983 को अपनी रिपोर्ट तत्कालीन राज्य सरकार को सौंप दी थी। सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में लागू 27% ओबीसी आरक्षण नीति महाजन आयोग की सिफारिशों पर आधारित नहीं है। मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपे गए अपने शपथपत्र में कई आधिकारिक रिपोर्टों का हवाला दिया है। इनमें 1994 से 2011 तक की राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की वार्षिक रिपोर्टें और साल 2022 की राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की रिपोर्ट शामिल हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि मौजूदा 27% ओबीसी आरक्षण नीति इन्हीं रिपोर्टों और उनके निष्कर्षों पर आधारित है, न कि महाजन आयोग की सिफारिशों पर।
गलत जानकारी फैलाने वालों पर कार्रवाई होगी
सरकार ने चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर रिपोर्टों या अकादमिक विश्लेषण के टुकड़े गलत संदर्भ के साथ डालना “निंदनीय और भ्रामक प्रचार” है। इस मामले में गंभीर जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मध्य प्रदेश सरकार ने दोहराया कि वह ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर सभी वर्गों के विकास और सामाजिक सद्भाव के लिए प्रतिबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी रहने के बीच सरकार ने वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन को नियुक्त कर यह संकेत दिया है कि वह 27% ओबीसी आरक्षण नीति का मजबूती से बचाव करेगी और किसी भी तरह की अफवाह या गलत जानकारी को फैलने नहीं देगी।
