दरभंगा: बिहार के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव में मजदूरी विवाद के बाद बड़ा मामला सामने आया है। यहां पूरे गांव के ब्राह्मण समुदाय के लोगों के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई है। पुलिस अब तक 12 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है और गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। मामला तनावपूर्ण जरूर है, लेकिन फिलहाल नियंत्रण में बताया जा रहा है।
मजदूरी के पैसे को लेकर शुरू हुआ विवाद
हरिनगर गांव निवासी असर्फी पासवान ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि उनके बेटे विक्रम पासवान ने गांव के हेमकांत झा का मकान बनवाने का काम कराया था। उनके मुताबिक करीब ढाई लाख रुपए मजदूरी के पांच साल से बकाया थे। कई बार पैसे मांगने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ, जिससे विवाद बढ़ता गया। 30 जनवरी 2026 को इस मामले को लेकर गांव में पंचायत भी हुई, लेकिन पंचायत के दौरान ही दोनों पक्षों में कहासुनी और तनाव बढ़ गया। आरोप है कि इसी विवाद के बाद ब्राह्मण समाज के कुछ लोग एकजुट हो गए और पासवान परिवार से दुश्मनी बढ़ गई।
घर में घुसकर मारपीट और लूट का आरोप
असर्फी पासवान के अनुसार 31 जनवरी की सुबह उनका बेटा विक्रम पासवान सब्जी खरीदकर घर लौट रहा था, तभी गांव के कई लोग लाठी-डंडे, लोहे की रॉड और धारदार हथियार लेकर उस पर हमला कर बैठे। आरोप है कि हमलावर उसे दौड़ाते हुए घर तक ले गए और घर में घुसकर बेरहमी से पीटा। मारपीट में विक्रम पासवान गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गया। बीच-बचाव करने पहुंचे उसके भाई राजगीर पासवान, अविनाश पासवान, अजय पासवान और जिगर पासवान को भी पीटा गया। असर्फी पासवान ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी रामतारा देवी और पोती कोमल कुमारी के साथ भी मारपीट की गई, पोती की कमर की हड्डी टूट गई और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार हुआ। आरोपियों पर घर में रखे सोने-चांदी के गहने, करीब 2 लाख रुपए नकद, मोबाइल, एलसीडी टीवी और फ्रिज लूटने का भी आरोप है। घर के बाहर खड़ी चार बाइक भी क्षतिग्रस्त कर दी गईं।
FIR में 70 नामजद और 100–150 अज्ञात आरोपी
पुलिस के मुताबिक असर्फी पासवान की शिकायत पर SC/ST एक्ट सहित कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। FIR में 70 ब्राह्मणों को नामजद आरोपी बनाया गया है, जबकि 100–150 अज्ञात लोगों को भी शामिल किया गया है। शिकायत में कहा गया है कि हमले के दौरान जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। नामजद आरोपियों में प्रमुख रूप से हेमकांत झा, श्रीनाथ झा, सुधांशु झा, प्रह्मद कुमार झा, रुना झा, सतीश झा, पंकज झा, मनोज मिश्र, बीजो मिश्र, मिठू झा, पवन झा, मनीष झा, लोपित झा, दयाल झा, लाल मिश्र, श्रवण झा, सूरज झा, प्रकाश मिश्र, सत्यम झा, राजेश झा, महंत मिश्र, सीताराम मिश्र, आनंद झा, आदित्य झा, तरुण झा, हरहर झा, नारायण झा, त्रिपुरारी झा, अर्कनाथ झा, उदय चंद्र झा, अमरनाथ झा, अरुण झा, रौशन झा, संतोष कुमार झा, ओमप्रकाश झा, फुलकांत झा, नमामी शंकर झा, प्रह्लाद झा, लालू झा, शिवम झा, हरिबोल मिश्र, शंभू मिश्र, धीरज झा, भास्कर झा, सौरभ मिश्र, रविशंकर मिश्र, आशीष झा, बिजली मिश्र, रूपन झा, नितीश झा, नवनीत झा, संजीत झा, काशी झा, हेमंत झा, गणपत मिश्र, लखी झा, श्रवण मिश्र, हिमंकर झा, विजय झा, आनंद कुमार झा, लाल बीजा झा, रजनी झा, जगरनाथ झा, चंदन झा, सतन झा, गुड्डू कुमार झा और सत्यनारायण झा समेत अन्य नाम शामिल हैं। घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 12 लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। गांव में एहतियातन अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
DSP का बयान और NCIB की प्रतिक्रिया
बिरौल के DSP प्रभाकर तिवारी ने बताया कि यह मामला पुराने लेनदेन और मजदूरी विवाद से जुड़ा है। उनके अनुसार 31 जनवरी की रात दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई थी, जिसमें 10 से अधिक लोग घायल हुए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इसे जातीय रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है। इस बीच राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो (NCIB) नामक NGO ने भी FIR की कॉपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की है। NCIB ने सवाल उठाया कि जिन लोगों पर केस दर्ज किया गया है, उनमें से कई दिल्ली और मुंबई में मजदूरी करते हैं, फिर उन्हें आरोपी कैसे बनाया गया। संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। गांव में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है, लेकिन कानून-व्यवस्था नियंत्रण में है।
