ललितपुर: उत्तर प्रदेश के डगडगी गांव की गौशाला में अव्यवस्थाओं की शिकायतों के बाद कवरेज करने पहुंचे पत्रकार देवेंद्र कौशिक पर हमला किए जाने की घटना अब बड़ा विवाद बन गई है। वीडियो में दिख रहा है कि पत्रकार को दौड़ाकर पीटा गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि उसी घटना में पत्रकार को ही आरोपी बना दिया गया है। उन पर SC/ST Act सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस उलट परिस्थिति ने जिला प्रशासन, पत्रकारिता की स्वतंत्रता और स्थानीय सत्ता के रवैये को लेकर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।
कवरेज करने गए पत्रकार पर हमला, अस्पताल में चल रहा इलाज
घटना उस समय हुई जब देवेंद्र कौशिक गौशाला के हालात रिकॉर्ड कर रहे थे। इसी दौरान अचानक करीब दर्जनभर महिलाएँ और कुछ पुरुष उनके पास पहुंचे और कैमरा बंद करने को कहा। बात बिगड़ते ही भीड़ आक्रामक हो गई और लोगों ने उन्हें दौड़ाकर लात-घूंसों से पीटना शुरू कर दिया। इस हमले में पत्रकार गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें देर रात मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अनुराग अवस्थी भी अस्पताल पहुंचे और घायल पत्रकार का बयान दर्ज किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है। हालांकि संवाद न्यूज एजेंसी ने वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि करने से इंकार किया है, लेकिन वायरल फुटेज ने प्रशासन की कार्रवाई और पूरी घटना की सच्चाई को लेकर गहरी शंकाएँ पैदा कर दी हैं।
उल्टा पत्रकार ही आरोपी — पंचायत सचिव की तहरीर पर SC/ST Act में मुकदमा
हमले के कुछ ही समय बाद ग्रामीण प्रशासन की ओर से मामला पूरी तरह बदल गया। ग्राम पंचायत सचिव इंद्रेश कुमार गौतम ने गिरार थाने में तहरीर देकर दावा किया कि पत्रकार देवेंद्र कौशिक, पंचायत सदस्य मनोज कुशवाहा और अरविंद मिश्रा जबरन गौशाला में घुसे। सचिव के मुताबिक, इन लोगों ने कर्मचारियों और महिलाओं से गालीगलौज की, अवैध पैसों की मांग की और जान से मारने की धमकी दी। इसी शिकायत को आधार बनाकर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए इन तीनों पर SC/ST Act समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। यह एफआईआर सामने आते ही विवाद और बढ़ गया, क्योंकि जिस व्यक्ति को वीडियो में पिटते हुए दिखाया जा रहा है, उसी को अब आरोपी भी घोषित कर दिया गया है।
प्रशासन की जांच और ‘सब ठीक’ बताए जाने पर बढ़े सवाल
घटना के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और डीएम ने गौशाला की जांच के लिए टीम भेजी। जांच के बाद प्रशासन ने बयान जारी किया कि गौशाला की व्यवस्थाएं “दुरुस्त” मिलीं। लेकिन यह बयान आते ही लोगों की नाराज़गी और बढ़ गई। सवाल उठने लग गए कि अगर गौशाला में कुछ गलत नहीं था, तो फिर पत्रकार पर हमला किस कारण हुआ? सोशल मीडिया में इस बयान को लेकर भी खूब चर्चा हो रही है। कई लोग इसे लीपापोती बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे सचिव के पक्ष में सबूत मान रहे हैं। प्रशासन के इस स्टैंड से हालात और उलझते दिख रहे हैं।
लोगों की प्रतिक्रिया — पत्रकारिता की आज़ादी पर सवाल, आरोपों की सच्चाई पर बहस
पूरे मामले ने दो तरह की प्रतिक्रियाएँ पैदा कर दी हैं। एक बड़ा वर्ग सोशल मीडिया पर लिख रहा है कि पत्रकार को पिटाया भी गया और उसी पर SC/ST Act लगा दिया गया। इससे लोगों में यह भावना गहरी हो रही है कि कहीं यह घटना दबाव बनाने और सच्चाई सामने आने से रोकने की कोशिश तो नहीं थी। दूसरी ओर कुछ लोग पंचायत सचिव के आरोपों का समर्थन भी कर रहे हैं और इसे पत्रकार का “गलत रवैया” बता रहे हैं। इन उलटी प्रतिक्रियाओं के बीच यह मामला अब केवल एक हमला नहीं रहा, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता, प्रशासन की निष्पक्षता और SC/ST Act के इस्तेमाल को लेकर गंभीर बहस का विषय बन गया है।
