ब्राह्मण लड़कियों पर विवादित टिप्पणी के बाद IAS संतोष वर्मा सस्पेंड — मध्यप्रदेश सरकार ने तात्कालिक कार्रवाई की

भोपाल — मध्यप्रदेश सरकार ने IAS अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण लड़कियों को लेकर किए गए विवादित बयान को गंभीरता से लेते हुए तुरंत प्रभाव से उन्हें निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ सिविल सर्विस आचरण नियमों के उल्लंघन के आरोप में शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है और उनसे सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। संतोष वर्मा 2014 बैच के MPPSC अधिकारी हैं जिन्हें 2021 में IAS पद मिला था, और वे कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत थे तथा SC-ST अधिकारी-कर्मचारी एसोसिएशन (AJAKS) के अध्यक्ष भी हैं।

विवादित टिप्पणी और उसका असर

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब 23 नवंबर को अंबेडकर मैदान, तुलसी नगर, भोपाल में आयोजित एक प्रांतीय सम्मेलन के दौरान वर्मा ने कहा— “आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए जब तक कि कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान में न दे।” यह बयान जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, प्रदेशभर में इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई। वीडियो और ऑडियो तेजी से फैलने लगे, और ब्राह्मण समुदाय ने इसे अपनी बेटियों और समाज के सम्मान पर सीधा वार बताया। इस टिप्पणी ने IAS आचार संहिता ही नहीं बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े किए।

विरोध प्रदर्शन, FIR की मांग और सार्वजनिक आक्रोश

बयान के बाद टिकमगढ़ सहित कई जिलों में ब्राह्मण समाज और परशुराम सेना द्वारा विरोध रैलियाँ आयोजित की गईं। परशुराम सेना युवा संगठन के अध्यक्ष अधिवक्ता सौरभ शर्मा ने कहा कि सरकार “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के नारे देती है, लेकिन एक उच्च अधिकारी द्वारा ऐसी अभद्र टिप्पणी करना शर्मनाक है। प्रदर्शनकारियों ने न केवल निलंबन बल्कि FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की। कई जगहों पर ज्ञापन सौंपे गए, पोस्टर लगे, और “बेटियों का अपमान बंद करो” जैसे नारे लगाए गए। जनता का गुस्सा शांत होने के बजाए बढ़ता ही गया।

संतोष वर्मा पर पहले भी कई आरोप और विवाद

यह पहला मौका नहीं है जब संतोष वर्मा विवादों में आए हों। पहले भी उन पर कई गंभीर आरोप लग चुके हैं—
2021 में वे CBI जज के हस्ताक्षर की जालसाजी के मामले में जेल जा चुके हैं। उन पर एक महिला को धमकाने और अश्लील सामग्री फैलाने के आरोप भी लगे। इसी तरह कोर्ट के फर्जी ऑर्डर बनवाकर प्रमोशन हासिल करने का मामला भी उनके नाम से जुड़ा है। इसके बावजूद वे मध्यप्रदेश की कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर रहे और कई बार राज्य के सिस्टम और अधिकारियों से टकराव की स्थिति बनी।

सरकार का आधिकारिक रुख और आगे की कार्रवाई

सरकार ने कहा है कि प्रशासनिक सेवा में पदस्थ अधिकारी से संयमित, मर्यादित और निष्पक्ष आचरण की अपेक्षा की जाती है। किसी भी समुदाय या बेटी जैसे संवेदनशील विषय पर अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार्य नहीं हो सकती। वर्मा ने अपने बयान पर माफी मांगी है, लेकिन विरोध की तीव्रता कम नहीं हुई है, और कई संगठनों का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं — कानूनी कार्रवाई भी अनिवार्य है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि वर्मा के जवाब के बाद सरकार क्या अंतिम निर्णय लेती है और क्या आगे गिरफ्तारी जैसे कदम उठाए जाते हैं।

+ posts

Leave a Reply

Previous Story

“छोड़ दो… मत मारो”—सागर में युवक की डंडों से पीट-पीटकर हत्या, सड़क पर घसीटा गया

Next Story

संविधान से छल’ का आरोप: धर्मांतरण के बाद भी SC लाभ लेने वालों पर इलाहाबाद HC सख्त, पूरे यूपी में जांच के आदेश

Latest from Madhya Pradesh

अनिल मिश्रा की जमानत याचिका पर रविवार को भी सुनवाई, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब के लिए सिर्फ एक दिन का समय दिया

ग्वालियर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने शुक्रवार को अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा की गिरफ्तारी…

फोकट सवाल’ कहकर पत्रकार पर भड़के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय : देश के सबसे साफ शहर इंदौर में जहरीले पानी से 10+ मौतों पर सियासी तूफान

इंदौर :मध्य प्रदेश के सबसे साफ शहर कहे जाने वाले इंदौर में दूषित पानी से हुई…

फर्जी दस्तावेज़ और विवादित बयान पर घिरे IAS संतोष वर्मा के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार बर्खास्तगी का प्रस्ताव केंद्र को भेजेगी

भोपाल :मध्यप्रदेश सरकार ने IAS अधिकारी संतोष वर्मा को कृषि विभाग में उप सचिव के पद…