लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अभिनेता मनोज बाजपेयी की आने वाली वेब फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ रिलीज से पहले ही बड़े विवाद में फंस गई है। फिल्म के टाइटल और कंटेंट को लेकर धार्मिक और जातिगत भावनाएं आहत होने की शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के निर्देश पर लखनऊ के हजरतगंज थाने में डायरेक्टर, मेकर्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म और पूरी टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि फिल्म का नाम और प्रचार सामग्री सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ सकती है और एक खास समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली है।
टाइटल से शुरू हुआ विवाद और सरकार तक पहुंचा मामला
फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ की घोषणा 3 फरवरी 2026 को मुंबई में हुए एक इवेंट के दौरान की गई थी, जहां ओटीटी प्लेटफॉर्म ने अपने साल 2026 के नए प्रोजेक्ट्स की जानकारी दी थी। फिल्म का फर्स्ट लुक सामने आते ही दर्शकों के बीच चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने इसे दिलचस्प क्राइम ड्रामा बताया, लेकिन इसके टाइटल को लेकर तुरंत विवाद भी शुरू हो गया। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने कहा कि फिल्म का नाम जातिसूचक है और इससे एक समुदाय को गलत तरीके से दिखाया जा रहा है। विरोध बढ़ने के साथ शिकायतें प्रशासन तक पहुंचीं, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया और कार्रवाई के निर्देश दिए।
हजरतगंज थाने में केस दर्ज, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और भावनाएं आहत करने का आरोप
सरकारी निर्देश के बाद लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में वेब फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के डायरेक्टर और पूरी टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस के अनुसार शिकायत में कहा गया है कि फिल्म का टाइटल और उससे जुड़ी सामग्री सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करती है और धार्मिक व जातिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। एफआईआर में खास तौर पर यह भी दर्ज किया गया है कि फिल्म के नाम और कंटेंट से ब्राह्मण समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। इसी आधार पर पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले की जांच की जा रही है कि फिल्म का प्रचार और कंटेंट कानून व्यवस्था पर क्या असर डाल सकता है।

ब्राह्मण समुदाय की आपत्ति, सोशल मीडिया पर विरोध और बहिष्कार की मांग
फिल्म के नाम को लेकर ब्राह्मण समाज से जुड़े लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि फिल्म का टाइटल समुदाय को नकारात्मक तरीके से दिखाता है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार पोस्ट और प्रतिक्रियाएं सामने आईं, जहां कई लोगों ने फिल्म का विरोध किया और इसे रिलीज न करने की मांग तक कर डाली। कुछ संगठनों ने इसे समाज में जातिगत तनाव बढ़ाने वाला बताया और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की। विरोध बढ़ने के बाद यह मुद्दा तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया।
नीरज पांडे का बयान, प्रमोशनल कंटेंट हटाया गया और फिल्म की पूरी कहानी
विवाद बढ़ने के बाद फिल्म के निर्माता नीरज पांडे ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि ‘घूसखोर पंडत’ एक काल्पनिक कहानी है और ‘पंडत’ शब्द किसी जाति या समुदाय के लिए नहीं बल्कि एक किरदार के नाम के रूप में इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने साफ किया कि फिल्म का उद्देश्य केवल मनोरंजन है और किसी धर्म, जाति या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। उन्होंने यह भी माना कि फिल्म के टाइटल से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, इसलिए फिलहाल फिल्म का टीजर और अन्य प्रमोशनल कंटेंट सोशल मीडिया से हटा दिया गया है ताकि किसी तरह की गलतफहमी न फैले और लोग फिल्म को उसके पूरे संदर्भ में समझ सकें। फिल्म की कहानी एक क्राइम ड्रामा पर आधारित है। इसमें मनोज बाजपेयी अजय दीक्षित नाम के एक भ्रष्ट दिल्ली पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं, जो पैसों के लालच में कई गलत फैसले लेता है और भ्रष्टाचार में शामिल रहता है। कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब उसे सड़क पर घायल मिली एक युवती से जुड़े केस की जांच सौंपी जाती है। इस जांच के दौरान वह एक बड़े और खतरनाक षड्यंत्र में फंस जाता है, जहां सत्ता, पैसा और अपराध का गहरा खेल सामने आता है। धीरे-धीरे कहानी एक बड़े खुलासे की तरफ बढ़ती है और उसका किरदार भी मुश्किल हालात में फंसता चला जाता है। फिल्म में मनोज बाजपेयी के साथ नुशरत भरुचा, दिव्या दत्ता, साकिब सलीम, अक्षय ओबेरॉय, श्रद्धा दास और कीकू शारदा जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज के लिए तैयार की जा रही है और 2026 की चर्चित वेब फिल्मों में से एक मानी जा रही है, लेकिन रिलीज से पहले ही विवाद ने इसे सुर्खियों में ला दिया है।
