फोकट सवाल’ कहकर पत्रकार पर भड़के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय : देश के सबसे साफ शहर इंदौर में जहरीले पानी से 10+ मौतों पर सियासी तूफान

इंदौर :मध्य प्रदेश के सबसे साफ शहर कहे जाने वाले इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बीच अब मामला सिर्फ स्वास्थ्य संकट तक सीमित नहीं रहा। पत्रकार के सवाल पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के आपा खोने और कैमरे पर आपत्तिजनक शब्द कहने से यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद में बदल गया है। भागीरथपुरा इलाके में जहरीला पानी पीने से 10 से ज्यादा लोगों की मौत, सैकड़ों के बीमार होने और सरकारी जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

दूषित पानी से मौतें, भागीरथपुरा में बिगड़े हालात

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में 24 दिसंबर 2025 से हालात बिगड़ने लगे, जब नर्मदा जल आपूर्ति लाइन में सीवेज का गंदा पानी मिल गया। इसके बाद इलाके में तेजी से डायरिया, उल्टी-दस्त और गंभीर संक्रमण के मामले सामने आए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 212 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 50 मरीज इलाज के बाद ठीक होकर घर लौटे। इस हादसे में महिलाओं के साथ एक छह महीने के मासूम बच्चे की भी मौत हुई है। यह इलाका खुद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इंदौर-1 विधानसभा क्षेत्र में आता है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

पत्रकार के सवाल पर मंत्री का गुस्सा, वीडियो हुआ वायरल

बुधवार रात जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय प्रभावित इलाके और अस्पतालों का दौरा कर लौटे, तो मीडिया ने उनसे सवाल किए। सवाल यह था कि निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले लोगों को अब तक बिल का पैसा क्यों नहीं लौटाया गया और इलाके में साफ पानी की वैकल्पिक व्यवस्था समय पर क्यों नहीं की गई। शुरुआत में मंत्री ने शांत रहकर जवाब दिया, लेकिन सवाल दोहराए जाने पर वे अचानक भड़क गए। मंत्री ने पत्रकार से कहा, “छोड़िए, फोकट सवाल मत पूछिए,” और बहस बढ़ने पर एक आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल कर दिया। यह पूरी बातचीत कैमरे में रिकॉर्ड हो गई और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। एनडीटीवी के पत्रकार अनुराग द्वारी ने मंत्री से संयमित भाषा में बात करने की बात भी कही, जिसके बाद विवाद और गहरा गया।

माफी, सियासी हमला और मुख्यमंत्री की सफाई

वीडियो वायरल होने के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बयान जारी कर कहा कि वे और उनकी टीम पिछले दो दिनों से बिना सोए प्रभावित इलाके में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दूषित पानी से उनके लोग परेशान हैं और कुछ ने अपनी जान भी गंवाई है। इसी गहरे दुख और तनाव में मीडिया के सवाल पर उनके शब्द गलत निकल गए, जिसके लिए उन्होंने अफसोस जताया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जब तक उनके लोग पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ नहीं हो जाते, वे चैन से नहीं बैठेंगे।इस बीच मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंत्री का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए दावा किया कि दूषित पानी से मरने वालों की संख्या आठ से बढ़कर दस हो चुकी है। उन्होंने बीजेपी नेताओं पर घमंड का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव से मंत्री का नैतिक आधार पर इस्तीफा मांग लिया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूरे मामले को आपात स्थिति जैसी हालत बताया और कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने पुष्टि की कि 212 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए थे, जिनमें से 50 ठीक होकर लौट चुके हैं। सरकार ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को निलंबित किया है, मामले की जांच शुरू कर दी गई है और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी चल रही है। फिलहाल, इंदौर में पानी संकट, मौतें और मंत्री के बयान को लेकर सवाल अब भी कायम हैं और लोग साफ पानी के साथ-साथ जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

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