SC-ST कानून के दुरुपयोग का आरोप, संशोधन की मांग: मुजफ्फरनगर में क्षत्रिय महासभा की बैठक, बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या का मुद्दा भी उठा

मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की ओर से सम्मान समारोह और विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षत्रिय समाज की एकता, मौजूदा सामाजिक मुद्दों और कानूनी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने SC-ST कानून के कथित दुरुपयोग पर चिंता जताई और इसमें संशोधन की मांग रखी। साथ ही बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या का मुद्दा भी उठाया गया।

SC-ST कानून, समाज की एकता और हाईकोर्ट बेंच पर चर्चा

कार्यक्रम में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद कुंवर हरिवंश सिंह और राष्ट्रीय महामंत्री राघवेंद्र सिंह (राजू) मौजूद रहे। उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने फोन पर सभा को संबोधित करते हुए संगठन के प्रयासों की सराहना की। पूर्व विधायक संगीत सिंह सोम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और समाज को संगठित व एकजुट रहने का संदेश दिया।
समारोह के दौरान विशिष्ट अतिथियों और सक्रिय कार्यकर्ताओं को फूलमालाएं, पटका, पगड़ी और प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। पदाधिकारियों को सम्मान पत्र भी सौंपे गए। विचार गोष्ठी में संगठन को मजबूत बनाने, आपसी एकता बनाए रखने और आने वाले समय में निर्णायक भूमिका निभाने पर जोर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. ए.पी. सिंह ने SC-ST कानून के दुरुपयोग को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि कानून के नाम पर समाज के एक वर्ग को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस विषय पर ठोस नीति और संवाद की जरूरत बताई। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग उठाई और इसे क्षेत्र की जनता के लिए न्याय से जुड़ा अहम मुद्दा बताया।

बांग्लादेश में हिंसा का मुद्दा, कड़े कदम की मांग

कार्यक्रम में हिंदू रक्षा सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद आनंद गिरि जी महाराज भी पहुंचे। उन्होंने बांग्लादेश में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां हिंदुओं पर हमले और हत्या की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने इस मामले में भारत सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग रखी। उनके बयान को लेकर कार्यक्रम में चर्चा हुई और वक्ताओं ने बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने कहा कि समाज से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण तरीके से चर्चा और संवैधानिक दायरे में समाधान तलाशना जरूरी है।

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