नई दिल्ली: NEET-PG क्वालिफाइंग परसेंटाइल में हाल ही में की गई कटौती को लेकर देश के कम से कम 15 प्रमुख मेडिकल संगठनों ने नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को पत्र लिखकर गंभीर चिंता जताई है। डॉक्टर संगठनों का कहना है कि पात्रता मानकों में बार-बार ढील देने से भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है और भविष्य में मरीजों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।
डॉक्टर संगठनों ने पत्र लिखकर जताई आपत्ति
इंडियन कॉलेज ऑफ फिजिशियंस (ICP), एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया (API) की अकादमिक शाखा और इंडियन एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल मेडिसिन (IACM) सहित कई बड़े संगठनों ने 8 और 9 फरवरी 2026 को NMC चेयरपर्सन को अलग-अलग पत्र भेजे। इन पत्रों में वरिष्ठ डॉक्टरों, शिक्षकों और मेडिकल विशेषज्ञों ने कहा कि पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एडमिशन के लिए पात्रता मानकों को लगातार कम करना एक खतरनाक प्रवृत्ति बनती जा रही है। उनका कहना है कि यह कदम मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है और भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैयारी पर असर डाल सकता है।
खाली सीटों की समस्या और कटऑफ कम करने का फैसला
ICP के डीन डॉ. गिरीश माथुर ने API के अध्यक्ष और कई डॉक्टरों की ओर से लिखे पत्र में कहा कि PG सीटों का खाली रहना प्रशासनिक और आर्थिक चुनौती जरूर है, लेकिन क्वालिफाइंग परसेंटाइल को बहुत कम स्तर तक घटाना कोई स्थायी और अकादमिक रूप से सही समाधान नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में NEET-PG परीक्षा में उम्मीदवारों के कमजोर प्रदर्शन के कारण सरकारी और बड़े मेडिकल संस्थानों की कई सीटें खाली रह गईं, जिससे सरकार पर आर्थिक बोझ भी बढ़ा। इसी कारण सीटें भरने के लिए बार-बार कटऑफ घटाया गया, लेकिन संगठनों का कहना है कि इस बार की कटौती बेहद ज्यादा है और यह स्थिति चिंताजनक बन चुकी है।
मेडिकल शिक्षा, मेरिट और मरीजों की सुरक्षा पर असर
डॉक्टर संगठनों ने अपने पत्रों में स्पष्ट कहा है कि पात्रता मानकों में इतनी बड़ी ढील देने से ऐसे उम्मीदवार भी PG मेडिकल ट्रेनिंग में प्रवेश पा सकते हैं जिनकी बुनियादी पढ़ाई, योग्यता और क्लिनिकल तैयारी पर्याप्त नहीं है। इसका असर केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पोस्टग्रेजुएट ट्रेनिंग वह चरण है जहां भविष्य के विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार होते हैं और जटिल क्लिनिकल फैसले लेना सीखते हैं, इसलिए प्रवेश स्तर पर समझौता पूरे स्वास्थ्य तंत्र को प्रभावित कर सकता है।
NMC से समीक्षा, वैकल्पिक समाधान और संवाद की मांग
IACM की ओर से मानद महासचिव डॉ. सुरेश कुशवाह ने भी पत्र में कहा कि अल्पकालिक प्रशासनिक या आर्थिक राहत के लिए लिए गए फैसले लंबे समय में मेडिकल मानकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। संगठनों ने NMC से इस निर्णय की समीक्षा करने और खाली सीटों की समस्या के लिए अकादमिक रूप से मजबूत और संतुलित विकल्प अपनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सीटों का उपयोग जरूरी है, लेकिन इसके साथ मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता, मेरिट सिस्टम और क्लिनिकल मानकों से समझौता नहीं होना चाहिए। साथ ही ICP/API और IACM ने NMC के साथ संवाद और सहयोग की इच्छा जताई है ताकि ऐसा समाधान निकाला जा सके जो विशेषज्ञ शिक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखे और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
