अलीगढ़: इगलास क्षेत्र के हसथपुर गांव का एक परिवार पिछले 15 सालों में एससी-एसटी एक्ट के तहत 16 मामले दर्ज कर चुका है। इन मामलों को लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है। जहां परिवार का कहना है कि पुलिस कार्रवाई नहीं करती और उन पर हमले व धमकियां होती रहती हैं, वहीं गांव वालों और आरोपियों का आरोप है कि यह परिवार कानून का गलत इस्तेमाल कर मुआवजा हासिल करता है। यही वजह है कि अब इस पूरे मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) की तीन सदस्यीय टीम गांव पहुंची है।
परिवार का आरोप – पुलिस कार्रवाई नहीं करती, मिल रही धमकियां
परिवार के मुखिया विष्णु ने आरोप लगाया है कि हाल ही में उनके पिता चंद्रपाल पर हमला हुआ लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उनका कहना है कि परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। परिवार का दावा है कि यदि पुलिस सही समय पर कदम उठाती तो उन्हें बार-बार आयोग तक गुहार नहीं लगानी पड़ती। इसके उलट गांव के कई लोगों का कहना है कि यह परिवार सिर्फ मुआवजा पाने के लिए झूठे केस दर्ज करता है। गांव के ही बबलू, जो ग्राम प्रधान के पति हैं, और एक अन्य निवासी श्रीकृष्ण ने आरोप लगाया कि हर छोटे-बड़े विवाद को यह परिवार एससी-एसटी एक्ट का मामला बना देता है।
कितने केस और कितनी रकम मिली
जांच में सामने आया कि 15 साल में कुल 16 केस दर्ज हुए हैं। इनमें से 5 मामलों में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगाकर यह कह दिया कि आरोप गलत या सबूत अधूरे थे। समाज कल्याण विभाग ने आयोग की टीम को बताया कि परिवार को अब तक 13 लाख रुपये का मुआवजा मिला है। हालांकि आयोग की टीम के पास उपलब्ध रिकॉर्ड में 46 लाख रुपये की भुगतान राशि दर्ज है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की ओर से इस मामले में डीआईजी सुमीत कौर के नेतृत्व में एक तीन सदस्यीय टीम अलीगढ़ पहुंची। टीम में उप निदेशक डॉ. आर. स्टालिन और लीगल एडवाइजर नीति चौधरी भी शामिल थे। टीम ने सर्किट हाउस में जिले के अधिकारियों के साथ करीब छह घंटे बैठक की और फिर गांव जाकर परिवार और ग्रामीणों दोनों से मुलाकात की। टीम ने परिवार के घर और खेतों का भी निरीक्षण किया, जहां घटनाओं के होने का दावा किया गया था। इसके बाद स्थानीय थाने में जाकर केस से जुड़े दस्तावेजों और जांच की स्थिति की समीक्षा भी की गई। जिलाधिकारी संजीव रंजन ने बताया कि आयोग की टीम ने अब तक दर्ज सभी मामलों और मुआवजा भुगतानों की पूरी जानकारी मांगी है। साथ ही घटनास्थल का भी दौरा किया गया। एसएसपी नीरज जादौन ने कहा कि परिवार की ओर से दर्ज 16 मामलों में से 5 पर पहले ही फाइनल रिपोर्ट लग चुकी है। आयोग की टीम ने दोनों पक्षों से बातचीत की है और अब आगे की कार्रवाई आयोग की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
पहले भी उठे थे सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब इस परिवार पर सवाल उठे हैं। साल 2017 में तत्कालीन डीएम ऋषिकेश भास्कर यशोद और एसएसपी राजेश कुमार पांडेय की संयुक्त रिपोर्ट में भी कहा गया था कि परिवार एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग कर रहा है। हालांकि आयोग ने उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और नई जांच का आदेश दिया था। आयोग की टीम ने इस बार भी गवाहों और अधिकारियों से बयान दर्ज किए हैं। अब इस पर अंतिम फैसला आयोग को लेना है कि परिवार पर लगे आरोप सही हैं या फिर वे सचमुच पीड़ित हैं। फिलहाल जांच जारी है और सभी की नजर आयोग की आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
