ब्राह्मण, राजपूत का बिहार की राजनीति में गुजारा नहीं कहने वाले RJD के राजीव यादव 34 हज़ार वोट से हारे

मीनापुर: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मीनापुर सीट ने इस बार राजनीति का पूरा माहौल बदल दिया। दो बार के विधायक और तेजस्वी यादव के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाने वाले आरजेडी उम्मीदवार राजीव कुमार उर्फ़ मुन्ना यादव को जदयू के अजय कुमार ने बंपर अंतर से हरा दिया। कभी विवादित बयान देकर सुर्खियों में आए मुन्ना यादव—जिन्होंने कहा था कि “ब्राह्मण और राजपूत का अब बिहार की राजनीति में गुजारा नहीं”—इस बार जनता के फैसले के आगे टिक नहीं सके। अजय कुमार ने 34,238 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जबकि मीनापुर ने बिहार में सबसे ज़्यादा 77.54% मतदान कर इतिहास रच दिया। महिलाओं का वोटर टर्नआउट 82.56% तक पहुंचा, जिसने इस सीट को पूरे राज्य में सबसे जागरूक साबित कर दिया।

अजय कुमार की ऐतिहासिक जीत, राजद का मजबूत गढ़ ढहा

मतगणना की शुरुआत से ही संकेत मिलने लगे थे कि मुकाबला एकतरफा होने वाला है। सुबह 9 बजे तक जदयू उम्मीदवार अजय कुमार ने बढ़त बना ली, जो हर राउंड में बढ़ती चली गई। 21वें राउंड तक अजय कुमार करीब 33 हज़ार वोट से आगे थे, और अंतिम नतीजों में उन्होंने 1,13,411 वोट हासिल किए। वहीं, आरजेडी के मुन्ना यादव 79,173 वोट पर सिमट गए। 2020 में 16 हज़ार की जीत दर्ज करने वाले मुन्ना यादव इस बार जनता के मूड को समझ नहीं पाए। दूसरी ओर अजय कुमार, जो कई चुनावों में हार चुके थे और दल–बदल की वजह से चर्चा में रहे—उन्होंने 2025 में शानदार वापसी की और जनता के भरोसे पर खरे उतरे।

मीनापुर का बदला सामाजिक समीकरण, जाति की राजनीति कमजोर हुई

मीनापुर हमेशा से राजनीतिक समीकरणों का केंद्र रहा है। यादव, कुशवाहा और सहनी समुदाय की बड़ी आबादी ने अक्सर यह सीट तय की है, लेकिन यह तथ्य भी अहम है कि यहां हर समाज को मौका मिला। कभी राजपूत समुदाय के जनक सिंह यहां से विधायक बने, तो भूमिहार समाज के रामकिशोर दास ने भी दो बार जीत दर्ज की। 1985 में हिंद केसरी ने यादव समाज का नेतृत्व स्थापित किया। 2000 में अजय कुमार के पिता दिनेश प्रसाद ने हिंद केसरी को हराकर कुशवाहा समाज को फिर स्थापित किया। 2015 में जब आरजेडी–जदयू एक साथ लड़े तो सीट RJD के खाते में चली गई और यहीं से मुन्ना यादव का उदय हुआ। 2020 में उन्होंने जदयू के मनोज कुमार को हराया था। लेकिन 2025 में मीनापुर के यादव–कुशवाहा–सहनी समीकरण टूट गया।जन सुराज के उम्मीदवार तेज नारायण सहनी वोट बैंक पर भरोसा कर मैदान में उतरे, लेकिन जनता ने उन्हें पूरी तरह खारिज कर दिया। इस बार जाति नहीं, बदलाव की राजनीति जीती।

रिकॉर्ड मतदान और सख्त काउंटिंग, मीनापुर ने दी जागरूकता की मिसाल

मीनापुर, जो कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता था और जहां स्वतंत्रता सेनानी जुब्बा सहनी को जिंदा जला दिया गया था, आज लोकतांत्रिक मजबूती का प्रतीक बन चुका है। 2025 के चुनाव में यहां की जनता ने अद्भुत उत्साह दिखाया—77.54% मतदान कर पूरे बिहार को पीछे छोड़ दिया। काउंटिंग सेंटर पर सुबह 8 बजे से ही भीड़ जुटने लगी थी। पोस्टल बैलट की गिनती पहले शुरू हुई और उसके बाद 14-14 टेबल पर ईवीएम की गिनती चलती रही। जैसे-जैसे राउंड बढ़ते गए, जनता की धड़कनें तेज होती गईं। लेकिन दोपहर बाद ही यह साफ हो गया कि मीनापुर इस बार नया फैसला कर चुका है। चुनाव आयोग ने भी सुबह के शुरुआती रुझानों पर भरोसा न करने की सलाह दी थी। असली तस्वीर दोपहर बाद सामने आई और मीनापुर ने बता दिया कि अब जातिगत बयानबाज़ी नहीं, विकास की राजनीति ही असली मुद्दा है।

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