मेरठ: उत्तर प्रदेश के दौराला थाना क्षेत्र के दादरी गांव में रविवार को गुर्जर समाज की महापंचायत बवाल में बदल गई। पंचायत बिना अनुमति बुलाई गई थी। जैसे ही पुलिस ने मंच संभाल रहे नेताओं और भीड़ को हटाने की कोशिश की, माहौल बिगड़ गया। भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया और पुलिस ने लाठियां भांजकर लोगों को खदेड़ दिया। इस दौरान अफरा-तफरी मच गई और कई लोग दौड़ते नजर आए। हालात काबू में करने के लिए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
पंचायत की पृष्ठभूमि: मिहिर भोज गेट विवाद
गुर्जर समाज ने यह महापंचायत मेरठ के कपसाड़ गांव में लगे गेट के विवाद को लेकर बुलाई थी। हाल ही में यहां “राजपूत सम्राट मिहिर भोज” नाम से गेट लगाया गया था। गुर्जर बिरादरी का कहना है कि सम्राट मिहिर भोज उनके महापुरुष हैं और इस पर ठाकुर समाज कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा है। गुर्जरों का आरोप है कि इस विवाद पर पुलिस-प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की और न ही बोर्ड हटाया। इसी के विरोध में दादरी गांव में यह पंचायत आयोजित की गई थी। पंचायत में मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, नोएडा और पश्चिमी यूपी के अन्य जिलों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। पंचायत का उद्देश्य था—गुर्जरों के हक, राजनीति में भागीदारी और जातीय विवादों के खिलाफ आवाज उठाना।
पुलिस की कार्रवाई और अलग-अलग दावे
पंचायत शुरू होते ही पुलिस की टीमें दादरी गांव पहुंच गईं और बिना अनुमति आयोजित किए जा रहे कार्यक्रम को रोक दिया। पुलिस ने मंच पर मौजूद कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। इसी बीच माहौल बिगड़ गया और भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया। हालात काबू से बाहर जाते देख पुलिस ने लाठियां भांजकर लोगों को खदेड़ा और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने कहा कि पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ युवक माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शांति व्यवस्था कायम की। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है, लेकिन किसी तरह की पत्थरबाजी नहीं हुई। वहीं, गुर्जर नेता सुभाष भाटी ने पुलिस पर तानाशाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पंचायत शांतिपूर्ण तरीके से चल रही थी, लेकिन पुलिस ने बीच से नेताओं को जबरन उठाकर ले जाया। उनका कहना है कि जातिवाद फैलाने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि गुर्जरों को ही निशाना बनाया गया। उन्होंने साफ कहा—“मैं भाजपा को मानता हूं, लेकिन मेरे लिए मेरी बिरादरी पहले है। हमारे साथ अन्याय हुआ ह
गिरफ्तारी और पुलिस लाइन के बाहर धरना
पुलिस ने हंगामे के दौरान राष्ट्रीय गुर्जर समाज संघर्ष समिति के अध्यक्ष रविंद्र भाटी गुर्जर सहित 22 लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया। इसमें सहारनपुर, नोएडा और अन्य जिलों के लोग भी शामिल थे। देर रात तक पुलिस लाइन में वार्ता चलती रही।रात 10:30 बजे के बाद प्रशासन ने 5 लोगों को रिहा कर दिया, जिनमें सहारनपुर के मोहित नागर, नितीश, बादल और आदित्य शामिल हैं। लेकिन अभी भी 17 लोग पुलिस हिरासत में हैं। सूत्रों का कहना है कि मुकदमे में और नाम जोड़े जा सकते हैं और सभी की तुरंत रिहाई की संभावना कम है। हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई की मांग को लेकर बड़ी संख्या में गुर्जर समाज के लोग पुलिस लाइन के बाहर दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए। उन्होंने साफ कहा कि अगर पुलिस का रवैया नहीं बदला तो आंदोलन जारी रहेगा।
सपा विधायक अतुल प्रधान का समर्थन और सरकार पर निशाना
तनाव बढ़ता देख सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पहले पुलिस लाइन के बाहर धरना दे रहे नेताओं से मुलाकात की और फिर उन्हें सर्किट हाउस के गार्डन में बुलाकर जमीन पर बैठकर बातचीत की।अतुल प्रधान ने कहा— “भाजपा सरकार सामाजिक भाईचारा खत्म कर रही है। महापुरुषों को बांटने का काम हो रहा है। शांतिपूर्वक बैठे लोगों की गिरफ्तारी निंदनीय है। प्रशासन को चाहिए कि बैठकर इन मुद्दों का समाधान करे, वरना समाज में आक्रोश और बढ़ेगा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जातीय राजनीति कर रही है और लोगों को आपस में बांटने का काम कर रही है। पुलिस लाइन के बाहर देर रात तक गुर्जर नेता और समर्थक डटे रहे। पुलिस ने कुछ लोगों को छोड़ा, लेकिन शेष 17 अभी भी हिरासत में हैं। प्रशासन और नेताओं के बीच लगातार वार्ता जारी है। वहीं, पुलिस ने इलाके में फोर्स बढ़ा दी है ताकि स्थिति काबू में रहे।
